संवेदनशील विभाग का कर्मचारी बन गया अश्लीलता का कारोबारी, हाइपर क्लब से जोड़कर परोसता रहा नग्नता
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/ कोरिया/सुजपुर। एक ओर छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग, जो जनता की जान बचाने और समाज को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी निभाता है। और दूसरी ओर उसी विभाग का कर्मचारी जेम्स बेक, जो समाज में नग्नता और अश्लीलता परोसने की तैयारी कर रहा था। रायपुर में उजागर हुए न्यूड पार्टी कांड ने न सिर्फ पुलिस महकमे को हिलाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सरकारी तंत्र में किस तरह भ्रष्ट और विकृत सोच वाले लोग जगह बनाए बैठे हैं।

जेम्स बेक: कोरिया और सूरजपुर से रायपुर तक ‘भ्रष्टाचार और अश्लीलता’ का सफर
कोरिया जिले के खुटहन पारा बैकुंठपुर का रहने वाला।
2012 में स्वास्थ्य विभाग की भर्ती में भारी घोटाला, सस्पेंड होकर फाइल गायब करने का आरोप।
बाद में सूरजपुर में पदस्थ, वहीं धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार में भी नाम, मई 2025 में केस दर्ज।
वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में सहायक ग्रेड-2 लिपिक, लेकिन असल जिंदगी में भ्रष्टाचार से अर्जित दौलत का मालिक।
शौक इतने महंगे कि हमेशा सोने से लदा रहता, और पास में 10 लग्जरी गाड़ियाँ – ऑडी, फॉर्च्यूनर, इनोवा, क्रेटा तक।

हाइपर क्लब से गहरी साजिश
जेम्स बेक रायपुर के हाइपर क्लब का संचालक।
यह क्लब पहले से ही विवादों में रहा, यहाँ कई बार पूल पार्टियों और अश्लील कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया कि हाइपर क्लब ही “अपरिचित क्लब” नाम से बने इंस्टाग्राम पेज और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए न्यूड पार्टी को प्रमोट कर रहा था।
युवाओं से ऑनलाइन एंट्री फीस लेकर अश्लीलता का बड़ा कारोबार खड़ा करने की कोशिश।
पुलिस की कार्यवाही
21 सितम्बर को भाठागांव स्थित फार्महाउस में आयोजित होने वाली थी न्यूड पूल पार्टी।
पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर जेम्स बेक सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इन पर धारा 4 स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम, धारा 67 आईटी एक्ट और धारा 79 भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध दर्ज।
समाज को ‘अश्लीलता और नग्नता’ की ओर धकेलने में लगा था
यह विडंबना ही है कि स्वास्थ्य विभाग जैसा संवेदनशील दफ्तर, जहाँ जनता की उम्मीदें जुड़ी होती हैं, वहीं से एक ऐसा कर्मचारी निकला जो समाज को ‘अश्लीलता और नग्नता’ की ओर धकेलने में लगा था। जेम्स बेक और उसका हाइपर क्लब अब पुलिस की पकड़ में हैं, लेकिन यह मामला सवाल छोड़ गया है— क्या जनता की सेवा का जिम्मा उठाने वाले विभागों में ऐसे लोग बैठे रहेंगे?
या अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ें उखाड़ने का वक्त आ गया है?
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