बचपन में बस्तर की गोलियों की दहशत देखी थी नम्रता ने : आज वही बेटी IAS है, और IPS पति के हाथों देश के सबसे बड़े नक्सली नेताओं का अंत देखकर गर्व से भर उठीं

रविकांत सिंह राजपूत। नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/गरियाबंद। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं, बचपन में नक्सलियों की अंधाधुंध गोलियां, दहशत और सन्नाटे को देखने वाली बस्तर की बेटी नम्रता जैन आज IAS अधिकारी हैं। लेकिन इस बार उनका परिचय सिर्फ प्रशासनिक अफसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक गर्वित पत्नी के रूप में उन्होंने उस ऐतिहासिक पल को महसूस किया, जिसे पूरा देश याद रखेगा।
नम्रता जैन के पति निखिल, जो वर्तमान में एक जिले के SP हैं, ने हाल ही में ऐसा एनकाउंटर ऑपरेशन लीड किया जिसने नक्सल इतिहास की तस्वीर बदल दी। इस एनकाउंटर में दो टॉप सेंट्रल कमेटी नक्सली नेता ढेर कर दिए गए, जिनमें सबसे वांटेड चालापति मनोज भी शामिल था। यह उपलब्धि इसलिए भी अनोखी है क्योंकि देश के इतिहास में अब तक कोई भी SP इस स्तर की सफलता हासिल नहीं कर पाया था।
नम्रता जैन ने सोशल मीडिया पर अपने दिल के जज्बात साझा करते हुए लिखा—
मैंने नजदीक से देखा है समर्पण, अनगिनत रातों की नींद और जिम्मेदारी का बोझ, जिसने यह सब संभव किया। यह सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि नक्सल नेतृत्व की जड़ों को हिला देने वाला मोड़ है। बचपन में बस्तर में डर और गोलियों की गूंज देखी थी, और आज निखिल की पत्नी के रूप में गर्व से खड़ी हूं। यह सिर्फ कागज पर जीत नहीं, बल्कि एक विरासत है, और मुझे गर्व है कि मेरे पति इसे लिख रहे हैं।
उन्होंने आगे लिखा—
निखिल ने वो किया जो इस देश में कोई और SP नहीं कर पाया। गरियाबंद जैसे इलाके में, जिसे कभी बड़ा नक्सली गढ़ नहीं माना गया, इतनी बड़ी सफलता मिली। यह सिर्फ बल से नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, रणनीति और असाधारण नेतृत्व से संभव हुआ।

बचपन का डर, अब गर्व की विरासत
नम्रता जैन का सफर संघर्षों से भरा रहा। 2015 में पहली बार UPSC में असफलता मिली, 2016 में 99वीं रैंक के साथ IPS बनीं, लेकिन हमेशा IAS बनने का सपना था। हैदराबाद पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने फिर से मेहनत की और 2018 में 12वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं। आज वे रायपुर जिले में अपर कलेक्टर है और एक अफसर होने के साथ-साथ एक पत्नी भी हैं। उन्होंने अपने पति की ऐतिहासिक उपलब्धि को न सिर्फ “विजय” कहा बल्कि इसे “विरासत” बताया।
नक्सलियों को करारा झटका
IPS निखिल की यह सफलता न सिर्फ एक जिला, बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल है। गरियाबंद जैसे इलाके में, जहां नक्सली ऑपरेशनों का बड़ा इतिहास नहीं रहा, इतनी बड़ी कार्रवाई ने नक्सल नेतृत्व की कमर तोड़ दी है। यह कहानी सिर्फ एक अफसर दंपत्ति की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो बचपन के डर से निकलकर बदलाव की विरासत लिख रही है। IAS नम्रता जैन और IPS निखिल की यह यात्रा आज हर परिवार के लिए प्रेरणा है।
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