The specified slider id does not exist.

रोज़गार के वादे निकले खोखले : खट और हड़िया-बर्तन संग महिलाओं ने किया एसईसीएल दफ्तर पर तालाबंदी

Share this post:

विस्थापितों को नौकरी का आश्वासन बना छलावा महिलाओं का फूटा गुस्सा अनोखे अंदाज़ में धरना चारपाई और बर्तन रखकर जताया विरोध पुलिस तैनात, एसईसीएल प्रबंधन सकते में

नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरबा। एक बार फिर विस्थापितों की पीड़ा सड़कों पर उतर आई। रोजगार के नाम पर वादाखिलाफी की राजनीति करने वाले एसईसीएल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करते हुए, सोमवार को कुसमुंडा क्षेत्र के मुख्यमहाप्रबंधक कार्यालय का मुख्य गेट महिलाओं ने तालाबंदी कर बंद कर दिया। खट (चारपाई) और हड़िया-बर्तन सजाकर महिलाओं ने जिस अनोखे अंदाज में धरना शुरू किया, उसने एसईसीएल के सिस्टम की पोल खोल दी।कुसमुंडा क्षेत्र की महिलाओं ने सोमवार को एसईसीएल मुख्य गेट पर धावा बोलते हुए प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि सालों से रोजगार देने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक किसी ठोस कदम की शुरुआत नहीं हुई।

महिलाओं का आरोप खदान विस्तार के नाम पर गांवों की जमीन हड़प ली

महिलाओं ने आरोप लगाया कि एसईसीएल ने खदान विस्तार के नाम पर गांवों की जमीन तो हड़प ली, लेकिन उसके एवज में न तो स्थायी नौकरी दी गई और न ही वैकल्पिक रोजगार। यही वजह है कि ग्रामीण परिवार आर्थिक तंगी से जूझने को मजबूर हैं। धरना स्थल पर महिलाओं ने साफ किया कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी आवाज़ अनसुनी की गई तो यह आंदोलन और तेज़ होगा और परिवार के अन्य सदस्य भी इसमें शामिल होंगे।

खुली एसईसीएल के सिस्टम की पोल

एसईसीएल प्रबंधन की यह पुरानी नीति रही है – वादे करना और उन्हें भूल जाना। ग्रामीणों को रोजगार का सपना दिखाकर जमीनें अधिग्रहीत कर लेना और फिर उनकी पीड़ा पर आंख मूंद लेना। यही कारण है कि विस्थापित अब खुद आंदोलन की राह पर उतरने को मजबूर हैं। महिलाओं की इस तालाबंदी ने साफ कर दिया है कि प्रबंधन की संवेदनहीनता और वादाखिलाफी अब बर्दाश्त नहीं होगी।

वातावरण और असर

महिलाओं की अचानक तालाबंदी से प्रबंधन सकते में आ गया। रोज़ाना दफ्तर आने-जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी असहज स्थिति में दिखे। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया, हालांकि पूरा माहौल तनावपूर्ण होने के बावजूद शांतिपूर्ण रहा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी लड़ाई रोजगार और अधिकार की है। उनका साफ संदेश है – “जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।”

About The Author

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

खबरें और भी हैं...

Advertisement Box

RO No. 13820/1

लाइव क्रिकट स्कोर

Gold and Silver price

मौसम अपडेट

राशिफल

© 2026 Nayi Pahal News  – All rights reserved. | News Website Development Services | New Traffic tail