
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत में दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस तर्क के बाद रायपुर की विशेष अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी।
ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने कहा
चैतन्य बघेल की भूमिका शराब घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग में मिली है। उन्हें 18 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। पाँच दिन की ईडी रिमांड पूरी हो चुकी है, और अब अदालत ने न्यायिक हिरासत मंजूर कर ली है।
❓ क्यों ईडी की गिरफ्त में आए पूर्व सीएम के बेटे ?
ईडी का कहना है कि छत्तीसगढ़ के 2019–2022 शराब घोटाले में करोड़ों की अवैध वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग हुई।
एजेंसी के मुताबिक इस घोटाले से जुड़े पैसों की हेरफेर और वित्तीय लेन-देन में चैतन्य बघेल की भूमिका सामने आई।
पूछताछ के दौरान वे बार-बार टालमटोल करते रहे और कई बिंदुओं पर सहयोग नहीं किया।
चैतन्य बघेल पर क्या आरोप हैं ?
1. मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) कानून के तहत मामला – कथित तौर पर शराब घोटाले की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) को छुपाने और रूटिंग करने में शामिल।
2. जांच में सहयोग न करना – ईडी का दावा है कि चैतन्य ने पूछताछ में जानबूझकर जानकारी छुपाई।
3. वित्तीय लेन-देन में संलिप्तता – एजेंसी का आरोप है कि घोटाले के दौरान हुए पैसों के प्रवाह से उनका सीधा संबंध है।
कब-कब क्या हुआ ?
18 जुलाई 2025 – ईडी ने भिलाई से चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया।
19 जुलाई 2025 – उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया और 5 दिन की ईडी रिमांड मिली।
23 अगस्त 2025 – रिमांड खत्म होने पर अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत दी।
6 सितंबर 2025 – अगली सुनवाई की तारीख तय।
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