शिक्षकों पर 20+ ऐप्स और कुत्तों की निगरानी का दबाव ! छत्तीसगढ़ में शिक्षण कार्य प्रभावित, संघ ने की अव्यवहारिक आदेशों को वापस लेने की मांग

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अव्यवहारिक आदेशों से छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था ‘ठप्प’, शिक्षक बने लिपिक और ‘नोडल अफसर’

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग  अपने एक अव्यवहारिक आदेश के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, जिसने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों को आए दिन गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाए जाने की शिकायत के बीच, ‘कुत्ता निगरानी’ जैसे आदेश ने शिक्षकों में गहरा आक्रोश और शिक्षा जगत में एक नया व्यंग्य का बाज़ार खोल दिया है।

​छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ के संयोजक एवं प्रदेश अध्यक्ष विष्णु प्रसाद साहू ने इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि शिक्षक अब पढ़ाई कराएँगे या कुत्तों की निगरानी? उन्होंने स्पष्ट किया कि एक ओर विभाग शिक्षा गुणवत्ता वर्ष के बड़े-बड़े पोस्टर लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को मतदाता सूची जांच से लेकर कुत्ता-पशु प्रबंधन तक हर गैर-शैक्षणिक कार्य में उलझाया जा रहा है। स्थिति की विडंबना यह है कि डीपीआई ने बकायदा प्राचार्य और प्रधान पाठकों को कुत्तों की निगरानी के लिए नोडल अफसर नियुक्त कर दिया है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर मीम, चुटकुले और तंज की बाढ़ आ गई है, मानो विभाग ने शिक्षा नहीं, बल्कि कुनबा-कुत्ता विश्लेषण का नया पाठ्यक्रम शुरू कर दिया हो।

शिक्षक बने ‘लिपिक’: 20 से अधिक ऑनलाइन कार्यों का बोझ

संघ के संचालक खोमन लाल साहू और प्रदेश सचिव विवेक धुर्वे ने चिंता जताई कि गैर-शैक्षणिक कार्यों से पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है। शिक्षकों पर राजस्व विभाग (जाति प्रमाण पत्र), वित्त विभाग (आर्थिक सर्वेक्षण), निर्वाचन आयोग (बीएलओ), और स्वास्थ्य विभाग जैसे कई विभागों के कार्य ऑनलाइन करने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक अब शिक्षक न रहकर लिपिक बन गए हैं। उनका निजी मोबाइल भी पूर्णतः सरकारी मोबाइल बन गया है, क्योंकि विभागीय कार्यों के लिए समग्र शिक्षा, पीएम पोषण, दीक्षा ऐप, निष्ठा ऐप, एमडीएम ऐप सहित 20 से अधिक प्रकार के ऐप डाउनलोड करवाए जाते हैं। वहीं, दूसरी ओर मोबाइल का उपयोग करने पर कार्रवाई की धमकी भी दी जाती है, जिससे शिक्षकों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। संघ के उपाध्यक्ष ममता वाडदे और गीता नायर ने स्पष्ट किया कि गैर-शैक्षणिक कार्यों से छात्रों का नैतिक स्तर भी प्रभावित हो रहा है और छत्तीसगढ़ शैक्षिक स्तर में अन्य राज्यों की तुलना में लगातार पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने इन अव्यवहारिक नीतियों और आदेशों को तत्काल वापस लेने की मांग की है ताकि शिक्षकों को उनका मूल काम— बच्चों को पढ़ाना— करने का समय मिल सके और छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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