20 साल का सफर और बचपन के यार, पैपिलॉन फार्म स्टे में दो दिनों तक जमेंगे यादों के रंग, जुटेगा 2006 का पूरा कारवां
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर | वक्त के साथ चेहरे बदल गए, जिम्मेदारियाँ बढ़ गईं, लेकिन बचपन की वो दोस्ती आज भी वैसी ही है। सरस्वती शिशु मंदिर मनेंद्रगढ़ के 2006 बैच के छात्र-छात्राएं एक बार फिर अपने सुनहरे दिनों को जीने के लिए तैयार हैं। राजधानी रायपुर के खूबसूरत पैपिलॉन फार्म स्टे में आगामी 10 जनवरी शनिवार और 11 जनवरी रविवार को इस भव्य ‘रियूनियन’ का आयोजन किया जा रहा है। इस खास मौके पर देश-विदेश के अलग-अलग कोनों से करीब 30 से 35 पूर्व छात्र-छात्राएं अपनी पुरानी यादों की पोटली लेकर रायपुर पहुँच रहे हैं।
स्कूल की प्रार्थना से लेकर डीजे नाइट तक
यह पुनर्मिलन केवल एक मुलाकात नहीं, बल्कि भावनाओं का एक उत्सव है। आयोजन की शुरुआत जहाँ ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक स्वागत के साथ होगी, वहीं समापन ‘विसर्जन मंत्र’ के साथ होगा, जो शिशु मंदिर की उस गहरी संस्कृति को दर्शाता है जहाँ से इन छात्रों की नींव पड़ी।
दो दिवसीय कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल
पहला दिन: यादों की शाम, दोस्तों के नाम
समारोह की शुरुआत शनिवार सुबह 11:00 बजे भव्य स्वागत के साथ होगी।
- दोपहर 02:00 बजे: सभी साथी स्कूल के बाद के अपने पिछले 20 वर्षों के जीवन के संघर्षों और सफलताओं के सफर को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे।
- शाम 05:30 बजे: मनोरंजन का दौर शुरू होगा, जिसमें डांस, सिंगिंग और कॉमेडी जैसे व्यक्तिगत परफॉरमेंस होंगे।
- रात 08:00 बजे के बाद: डीजे नाइट का आनंद लेने के बाद कड़ाके की ठंड में ‘बोनफायर’ (अलाव) के किनारे बैठकर सभी साथी रात्रि भोज करेंगे।
दूसरा दिन: लौटेंगे स्कूल के वही पुराने दिन
रविवार की सुबह एक बार फिर छात्रों को उनके स्कूल के दिनों में ले जाएगी।
- सुबह 07:00 बजे: कार्यक्रम की शुरुआत ‘स्कूल प्रार्थना’ के साथ होगी, जो सभी को फिर से वही अनुशासन और संस्कार याद दिलाएगी।
- पूल पार्टी और मस्ती: प्रार्थना और चाय के बाद छात्र ‘पूल पार्टी’ का आनंद उठाएंगे।
- विदाई का क्षण: सुबह 10:30 बजे भोजन मंत्र, विसर्जन मंत्र और यादगार फोटो सेशन के साथ इस दो दिवसीय उत्सव का समापन होगा।
बैच की ताकत: 35 साथियों का अनूठा मिलन
इस रियूनियन में बैच के लगभग 30 से 35 छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। इनमें से कई साथी आज डॉक्टर, इंजीनियर, व्यवसायी और उच्च पदों पर कार्यरत हैं, लेकिन इस दो दिवसीय आयोजन के लिए वे अपने पदों और जिम्मेदारियों को किनारे रखकर फिर से वही ‘मनेंद्रगढ़ वाले स्कूली छात्र’ बन जाएंगे।
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