संविदा कर्मी और बाहरी युवक मिलकर काट रहे मरीजों की जेब, कलेक्टर तक पहुंची शिकायत
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बैकुंठपुर|छत्तीसगढ़ सरकार जहाँ एक ओर अंतिम व्यक्ति तक निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने के लिए संकल्पित है, वहीं कोरिया जिला अस्पताल बैकुंठपुर की पैथोलॉजी लैब भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का अड्डा बन चुकी है। यहाँ तैनात एक संविदा कर्मचारी ने जिला अस्पताल को अपनी ‘निजी जागीर’ बना लिया है, जहाँ जांच के नाम पर मरीजों से सरेआम पैसे वसूले जा रहे हैं।
रायपुर की लैब, एमडी पैथोलॉजी के साइन: आखिर जिला अस्पताल में ये ‘डिजिटल’ खेल क्या है ?
अस्पताल की लैब से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोप है कि जो जांचें जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, उनकी रिपोर्ट भी यहीं से बांटी जा रही है। लैब में पदस्थ संविदा कर्मचारी राधेश्याम चौरसिया और उनके निजी सहयोगी द्वारा रायपुर की एक संस्था ‘वन ग्लोबल सर्विस प्रोवाइडर लिमिटेड’ की डिजिटल रिपोर्ट थमाई जा रही है। मरीजों से डायबिटीज (HbA1c) जैसी जांचों के नाम पर भारी रकम वसूली जा रही है और बदले में डॉ. धनंजय प्रसाद (MD पैथोलॉजी) के डिजिटल हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट दी जा रही है। सवाल यह है कि जिला अस्पताल के भीतर निजी लैब की रिपोर्ट कैसे और किसके संरक्षण में बांटी जा रही है? यह रिपोर्ट फर्जी है या वास्तविक, यह अब उच्च स्तरीय जांच का विषय है।

पीड़ित की आपबीती: “600 रुपये दिए तब मिली मां की रिपोर्ट”
अस्पताल में चल रही इस लूट का शिकार हुए आशीष जायसवाल ने साहस दिखाते हुए कलेक्टर कोरिया को लिखित शिकायत सौंपी है। आशीष ने बताया कि 15 दिसंबर 2025 को वे अपनी मां अनीता जायसवाल के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर द्वारा लिखी गई जांच के लिए लैब में पदस्थ राधेश्याम चौरसिया और उसके साथी आकाश गुप्ता ने 600 रुपये की मांग की।
“जब मैंने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो मुझे रिपोर्ट देने से मना कर दिया गया। हार मानकर जब मैंने 17 दिसंबर को रुपये दिए, तब जाकर मुझे मेरी मां की जांच रिपोर्ट मिली। पूछने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।”
— आशीष जायसवाल, शिकायतकर्ता
सिविल सर्जन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
शिकायत में न केवल लैब कर्मियों, बल्कि अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। आरोप है कि लैब में केमिकल खरीदी के नाम पर भी बड़ा कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बिना ऊपरी संरक्षण के एक संविदा कर्मचारी इतनी निडरता से अवैध वसूली और निजी संस्थाओं की रिपोर्ट सरकारी अस्पताल में नहीं बांट सकता।



कलेक्टर से कार्यवाही की उम्मीद
कोरिया कलेक्टर चंदन त्रिपाठी को सौंपी गई इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। जिले की जनता अब यह देख रही है कि क्या स्वास्थ्य मंत्री के पड़ोसी जिले में मरीजों की जेब काटने वालों पर गाज गिरेगी या रसूख के आगे यह जांच ठंडे बस्ते में चली जाएगी।




