रायपुर/बलौदाबाजार|छत्तीसगढ़ के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाने की दिशा में एक बड़ी सफलता देखने को मिली है। बलौदाबाजार के मोहतरा में आयोजित प्रथम ‘समाधान शिविर’ उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया, जब मेडिकल मोबाइल यूनिट ने ग्रामीणों के लिए उम्मीद की संजीवनी पेश की।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा की संवेदनशीलता के चलते न केवल ग्रामीणों को घर बैठे इलाज मिला, बल्कि एक बुजुर्ग महिला के सुझाव पर अब प्रदेश में दवाइयों के वितरण की व्यवस्था में एक मानवीय बदलाव भी आने जा रहा है।
कैंप में उमड़ी भीड़: खेत की मेड़ से सीधे डॉक्टर की मेज तक
प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत संचालित यह मोबाइल यूनिट विशेष रूप से कमार बाहुल्य क्षेत्रों जैसे बल्दाकछार और औराई के लिए वरदान साबित हो रही है। कलेक्टर के निर्देश पर इसे समाधान शिविर में तैनात किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने निम्नलिखित सेवाओं का लाभ उठाया:
- निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण: गंभीर बीमारियों से लेकर मौसमी बीमारियों तक की जाँच।
- लैब टेस्ट की सुविधा: मौके पर ही खून और अन्य आवश्यक जाँचें।
- मुफ्त औषधि वितरण: डॉक्टर द्वारा परामर्श के बाद तुरंत दवाइयों की उपलब्धता।
कलेक्टर की संवेदनशीलता: रामबाई की सलाह और तत्काल निर्णय
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जब चांटीडीह की 65 वर्षीय बुजुर्ग रामबाई से उनका हाल जाना, तो शासन और जनता के बीच के संवाद की एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई।
साहब! इलाज और दवाई तो मुफ्त मिल रही है, पर ये खुली गोलियां हाथ में रखने से गिरने का डर रहता है। अगर पैकेट या लिफाफा मिल जाता तो बड़ी सुविधा होती।
— रामबाई (ग्रामीण)
इस छोटी लेकिन महत्वपूर्ण समस्या को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया। उन्होंने मौके पर ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को कड़े निर्देश दिए कि:
- पैकेजिंग व्यवस्था: अब से सभी दवाइयां सुरक्षित पैकेट या लिफाफे में दी जाएं।
- सुगम प्रवेश: बुजुर्गों और मरीजों की सुविधा के लिए एमएमयू वाहन में एक छोटी सीढ़ी (Step) की तत्काल व्यवस्था की जाए।
सुशासन का असली अर्थ: समाधान की ओर बढ़ते कदम
मोहतरा शिविर में एमएमयू की तैनाती यह दर्शाती है कि सरकार अब केवल दफ्तरों में नहीं, बल्कि जनता के दरवाजे पर खड़ी है। स्वास्थ्य विभाग के अमले को ओपीडी की संख्या बढ़ाने और दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी ग्रामीण बिना इलाज के वापस न लौटे।
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