‘हक की लड़ाई’ में एकजुट हुआ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन, 11 सूत्रीय मांगों पर अडिग, दफ्तरों में पसरा सन्नाटा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशव्यापी तीन दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप रहा। मंगलवार को जिले के तमाम विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई। ‘कलम बंद–काम बंद’ आंदोलन के चलते सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे शासन-प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
प्रमुख मांगें और आक्रोश
छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रांतीय सचिव दीपक कुमार साहू ने आंदोलन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपने जायज हक की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारी मुख्य मांगों में:
- केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA) प्रदान करना।
- लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति का स्थायी निराकरण।
- 300 दिवस के अर्जित अवकाश का नकदीकरण।
- सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाकर 65 वर्ष करना शामिल है।
शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक संघर्ष
आंदोलन के दूसरे दिन भी प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कर्मचारियों के तेवर बेहद सख्त नजर आए। जिला संयोजक श्री गोपाल सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा, “एमसीबी जिले का एक-एक कर्मचारी पूरी मजबूती के साथ इस लड़ाई में शामिल है। यह आंदोलन कोई शौक नहीं, बल्कि शासन की अनदेखी के खिलाफ मजबूरी में उठाया गया कदम है। जब तक सरकार हमारी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, हमारा संघर्ष और तेज होगा।”
चेतावनी: अगले चरण में होगा उग्र आंदोलन
फेडरेशन के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद भी शासन की नींद नहीं खुली, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और भी व्यापक और निर्णायक स्वरूप दिया जाएगा। दूसरे दिन की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
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