मशीनों का शोर और रात का अंधेरा बिछियाटोला में एनजीटी के नियमों की उड़ी धज्जियां, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अधिवक्ता रामनरेश पटेल ने की तत्काल रोक की मांग
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़/केल्हारी। एमसीबी जिले के केल्हारी तहसील अंतर्गत ग्राम बिछियाटोला में बहने वाली केवई नदी इन दिनों रेत माफियाओं और नियम विरुद्ध कार्यप्रणाली की भेंट चढ़ रही है। शासन से मिली अनुमति की आड़ में यहाँ जलधारा को छलनी करने और पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचाने का गंभीर मामला सामने आया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ (ग्रामीण) के अध्यक्ष अधिवक्ता रामनरेश पटेल ने इस बेलगाम उत्खनन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जांच होने तक उत्खनन पर ‘इमीडिएट बैन’ लगाने की मांग की है।
नियमों की ‘सूखी’ नदी : एनजीटी और शर्तों का खुला उल्लंघन
बिछियाटोला के खसरा नंबर 684 में 4.99 हेक्टेयर क्षेत्र में रेत उत्खनन की अनुमति ग्राम पंचायत को दी गई है, लेकिन धरातल पर पंचायत की यह खदान ‘अवैध प्रयोगों’ की प्रयोगशाला बन गई है।
अवैध उत्खनन के 4 बड़े आरोप:
- मशीनों का तांडव: नियमों के अनुसार मजदूरों से खनन होना चाहिए, लेकिन यहाँ JCB मशीनों का खुलेआम उपयोग कर नदी का सीना छलनी किया जा रहा है।
- रात का ‘काला’ कारोबार: एनजीटी के आदेशानुसार खनन केवल सूर्यास्त से पहले होना चाहिए, जबकि यहाँ रात के अंधेरे में उत्खनन कर रेत खपाई जा रही है।
- हरियाली पर कुल्हाड़ी: रेत निकासी के लिए रास्ता बनाने के नाम पर दर्जनों हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया है।
- तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप: आरोप है कि पंचायत ने नियम विरुद्ध तरीके से यह काम किसी निजी व्यक्ति को सौंप दिया है, जो पूरी तरह से प्रशासनिक शर्तों का उल्लंघन है।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग: “जब तक जांच, तब तक काम बंद”
रामनरेश पटेल ने अपने आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस उत्खनन को तुरंत नहीं रोका गया, तो नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन एक उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करे जो मौके पर जाकर मशीनों के निशानों और काटे गए पेड़ों का पंचनामा तैयार करे।



प्रशासन ने पंचायत को अनुमति ग्रामीणों के लाभ के लिए दी थी, न कि पर्यावरण और नदी को तबाह करने के लिए। एनजीटी के नियमों को पैरों तले कुचला जा रहा है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
— रामनरेश पटेल, अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस (ग्रामीण)
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
अब देखना यह होगा कि एमसीबी जिला प्रशासन इस शिकायत पर कितनी तेजी से एक्शन लेता है। क्या मशीनों को जब्त किया जाएगा? क्या नियमों को ताक पर रखने वाली पंचायत या ठेकेदार पर गाज गिरेगी? यह आने वाला समय बताएगा।




