नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी / रायपुर। सरगुजा अंचल का इतिहास केवल सत्ता के गलियारों में हुए राजनीतिक समझौतों का नहीं, बल्कि हक और बुनियादी सुविधाओं के लिए खून-पसीना बहाने वाले जनआंदोलनों का इतिहास रहा है। यह वह क्षेत्र है जहां सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ-साथ रेल की पटरियों के लिए दशकों तक आवाज बुलंद की गई। जब भी इस अंचल में रेल विकास का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम स्वर्गीय लरंग साय का उभरता है—एक ऐसा जुझारू नेता जिसने अंबिकापुर को रेल मानचित्र पर लाने के लिए संसद से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ी और रेल मांग को एक जनांदोलन में बदल दिया।
आज दशकों बाद, इतिहास एक बार फिर खुद को दोहराने के मुहाने पर खड़ा है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में ₹602 करोड़ की लागत से बनने जा रही पाराडोल-नागपुर रोड नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के ई-टेंडर जारी होते ही सरगुजा की राजनीति और जनमानस में एक नई बहस छिड़ गई है: क्या वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री व चिरमिरी विधायक श्याम बिहारी जायसवाल सरगुजा के दूसरे ‘रेल पुरुष’ के रूप में उभर रहे हैं?
₹602 करोड़ की महा-परियोजना: कागजों से निकलकर धरातल पर उतरी उम्मीदें
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) द्वारा जारी टेंडर ने एमसीबी जिले के विकास के नए रास्ते खोल दिए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा बेहद आधुनिक और दूरगामी है:
- 17.5 किमी की नई ब्रॉडगेज लाइन: पाराडोल टेकऑफ पॉइंट से नागपुर रोड स्टेशन तक लगभग 17.5 किलोमीटर लंबी नई सिंगल रेल लाइन बिछाई जाएगी।
- कनेक्टिविटी में सुधार: बोरीडांड-चिरमिरी रेलखंड पर स्लूइंग कार्य के जरिए इस नए ट्रैक को मौजूदा रेल नेटवर्क से सीधे जोड़ा जाएगा।
- समय-सीमा और मोड: इसे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन मोड पर 2 साल (730 दिन) के भीतर पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है।
- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: परियोजना के तहत बड़े पुल, ROB/RUB, वायाडक्ट, आधुनिक सिग्नलिंग, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और पूर्ण विद्युतीकरण शामिल है।
कोयला परिवहन को गति और यात्रियों को मिलेगी सुगम राह
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से स्वीकृत इस परियोजना का असर बहुआयामी होगा। जहां एक ओर चिरमिरी क्षेत्र से कोयला परिवहन को नई गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों के लिए देश के अन्य बड़े शहरों तक सीधी रेल कनेक्टिविटी के रास्ते खुलेंगे। औद्योगिक विकास के साथ-साथ यह परियोजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने का काम करेगी।
क्या ‘रेल पुरुष’ की नई विरासत तय कर पाएंगे जायसवाल ?
इतिहास केवल नारों या एक टेंडर से नहीं लिखा जाता; इतिहास निरंतरता और स्थायी परिवर्तन मांगता है। लरंग साय आज इसलिए पूजनीय हैं क्योंकि उन्होंने रेल को जन-अधिकार बनाया। श्याम बिहारी जायसवाल के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि वे इस ₹602 करोड़ की परियोजना को तय 730 दिनों में पूरा कराएं और अंबिकापुर-बरवाड़ीह जैसी दशक पुरानी लंबित मांगों को भी अंजाम तक पहुंचाएं।
यदि यह नई रेल लाइन समय पर बिछती है और क्षेत्र को नई एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात मिलती है, तो सरगुजा की जनता स्वयं तय करेगी कि उसे विकास का नया ‘रेल पुरुष’ मिल चुका है। आखिरकार, इतिहास किसी को उपाधि नहीं देता—इतिहास केवल उसे याद रखता है जो विकास को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत बना दे!
विकास का पहलू
- स्व. लरंग साय (संघर्ष का युग):
- राजनीतिक भूमिका: विपक्ष और जनसंघर्ष के मुखर नेता
- कार्यप्रणाली: पटरियों के लिए सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन
- मुख्य चुनौती: केंद्र सरकार पर दबाव बनाना और जन-समर्थन जुटाना
- मुख्य उपलब्धि: अंबिकापुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ना
- श्याम बिहारी जायसवाल (कार्यान्वयन का युग):
- राजनीतिक भूमिका: कैबिनेट मंत्री एवं सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधि
- कार्यप्रणाली: प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति देना और बजट आवंटन
- मुख्य चुनौती: स्वीकृत परियोजनाओं को समय-सीमा में धरातल पर उतारना
- मुख्य उपलब्धि: ₹602 करोड़ की पाराडोल-नागपुर लाइन को टेंडर तक पहुंचाना
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