प्राथमिक शाला चैनपुर के प्रधान पाठक का बड़ा खुलासा, जिला शिक्षा अधिकारी MCB को पत्र लिखकर पूर्व शिक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। शासकीय प्राथमिक शाला चैनपुर का प्रशासनिक विवाद अब एक नया और गंभीर मोड़ ले चुका है। विद्यालय की साख बिगाड़ने और मीडिया में भ्रामक खबरें प्रसारित कराने के मामले में प्राथमिक शाला चैनपुर के प्रधान पाठक ने जिला शिक्षा अधिकारी एमसीबी को एक पत्र सौंपकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पत्र में विद्यालय में पूर्व में पदस्थ शिक्षिका सविता गुप्ता पर संस्था और विभाग की छवि धूमिल करने के साथ-साथ गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
स्थानांतरण की ‘खुन्नस’ में झूठे आरोपों का जाल ?
प्रधान पाठक ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि शिक्षिका सविता गुप्ता का पूर्व में शाला चैनपुर से युक्तीकरण के तहत स्थानांतरण जनकपुर (वर्तमान में भरतपुर) किया गया था। आरोप है कि इसी स्थानांतरण की खुन्नस में आकर उक्त शिक्षिका द्वारा बार-बार झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर प्रधान पाठक व्यक्तिगत रूप से और शिक्षा विभाग की साख को ठेस पहुँचाने का प्रयास कर रही हैं।
फर्जी दाखिले का खेल: ‘अपार आईडी’ ने खोली पोल
पत्र में किए गए सबसे बड़े खुलासे के अनुसार, शिक्षिका सविता गुप्ता ने युक्तीकरण की प्रक्रिया से बचने के लिए विद्यालय में फर्जी बच्चों का दाखिला दर्ज कर रखा था।
- ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा: युक्तीकरण से बचने के लिए शिक्षिका ने स्वयं के देवर के बच्चों, स्कूल की ही एक अन्य शिक्षिका नीलम तिवारी के देवर के बच्चों और मध्याह्न भोजन सहायिका के बच्चों के नाम विद्यालय के रजिस्टर में दर्ज करा रखे थे।
- अपार आईडी से खुला राज: जब भारत सरकार द्वारा ‘अपार आईडी’ (APAAR ID) जनरेशन का कार्य अनिवार्य किया गया, तब यह राज खुला कि एक ही बच्चे का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज है और दो जगह अपार आईडी बनना असंभव था।
- यू-डाइस पोर्टल से हटाए गए नाम: मामला सामने आते ही तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) मनेंद्रगढ़ ने विद्यालय का सघन निरीक्षण किया। जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर उन सभी फर्जी नामांकित बच्चों के नाम तत्काल यू-डाइस (U-DISE) पोर्टल से डिलीट कराए गए।
विभाग के आदेशों की अवहेलना और भ्रामक प्रचार
प्रधान पाठक के अनुसार, युक्तीकरण के पश्चात् उक्त शिक्षिका की पदस्थापना वर्तमान में भरतपुर विकासखंड में की गई है। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि उन्होंने आज पर्यन्त तक अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। कार्यभार संभालने के बजाय उनके द्वारा लगातार भ्रामक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जो सिविल सेवा आचरण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन और पूरी तरह से अवैधानिक है।
संगठनात्मक दबाव और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी
पत्र में यह भी उजागर किया गया है कि उक्त शिक्षिका एक कर्मचारी संगठन विशेष की महिला पदाधिकारी रही हैं। पद का दुरुपयोग करते हुए संगठन का अनावश्यक दबाव बनाकर अनुचित कार्य कराने का भरसक प्रयास किया जाता रहा है।
”फर्जी बच्चों के नाम काटने की वैधानिक कार्रवाई से बौखलाकर संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष द्वारा सोशल मीडिया (फेसबुक) पर मेरे खिलाफ बेहद गंभीर, आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणियां की गईं।” — प्रधान पाठक, प्रा. शा. चैनपुर
कड़ी कार्रवाई की मांग: ‘अप्रिय घटना हुई तो संगठन और शिक्षिका होंगे जिम्मेदार’
प्रधान पाठक ने जिला शिक्षा अधिकारी से पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए शिक्षिका सविता गुप्ता के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
इसके साथ ही उन्होंने पत्र में अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि उक्त शिक्षिका और उनके संगठन के ब्लॉक प्रमुख द्वारा उन्हें लगातार अनुचित धमकियां दी जा रही हैं। यदि भविष्य में उनके साथ कोई भी अप्रिय या अनुचित घटना घटित होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी उक्त शिक्षिका और संबंधित संगठन पदाधिकारियों की होगी।
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