राजनीति के ककहरा से संसद की चौखट तक: दलबीर – राजेश नंदिनी की धरोहर, जिसने विंध्य के जन-मन पर अपनी अटूट छाप छोड़ी
नई पहल न्यूज डेस्क। शहडोल / भोपाल। विंध्य की पावन धरा, घने जंगलों, खनिज संपदा और जनजातीय परंपराओं से समृद्ध शहडोल संसदीय सीट पर जब-जब जनसेवा, राजनीतिक साख और विकासपरक दृष्टि की बात होती है, तब-तब एक नाम सबसे प्रमुखता से चमकता है—हिमाद्री सिंह।
लगातार दो बार प्रचंड जनसमर्थन हासिल कर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में शहडोल की आवाज बुलंद करने वाली हिमाद्री सिंह सिर्फ एक जन प्रतिनिधि नहीं, बल्कि गोंडवाना अंचल की लाखों बेटियों और युवाओं के लिए आत्मसम्मान, दृढ़ता और सेवा भावना की सजीव मिसाल हैं। सियासत जिनके खून में बहती है, सादगी जिनकी पहचान है और अपने अंचल का चौमुखी विकास जिनका एकमात्र संकल्प है।

1. रक्त में सियासत, संस्कारों में जनसेवा: माता-पिता की संयुक्त विरासत

हिमाद्री सिंह का जन्म एक ऐसे प्रतिष्ठित परिवार में हुआ, जहाँ राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का जरिया नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुँचाने का माध्यम रही। उनके पिता स्व. दलबीर सिंह शहडोल के दिग्गज और कद्दावर आदिवासी नेता रहे, जिन्होंने कांग्रेस से विधायक और सांसद के रूप में क्षेत्र के अधिकारों की लड़ाई संसद में लड़ी। वे दो बार केंद्रीय मंत्री भी थे। वहीं उनकी माता स्व. राजेश नंदिनी सिंह ने भी लोकसभा में शहडोल का प्रतिनिधित्व किया और क्षेत्र की जनसमस्याओं को प्रखरता से उठाया।
माता-पिता की अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद, हिमाद्री ने दोनों से केवल एक ही पाठ सीखा—‘जनता से बिना किसी निस्वार्थ भाव के जुड़ाव’। कम उम्र में ही सिर से माता-पिता का साया उठ जाने के बाद भी हिमाद्री ने जिस अदम्य साहस, धैर्य और परिपक्वता से खुद को संभाला और अंचल के लोगों के सुख-दुख में भागीदार बनीं, उसी ने उनके जुझारू व्यक्तित्व को गढ़ा।
2. शून्य से शिखर का सफर: 2019 का पर्दापण और 2024 की ऐतिहासिक हैट्रिक-सदृश जीत
- 2019 का राजनीतिक पदार्पण: भारतीय जनता पार्टी ने जब हिमाद्री सिंह की बेदाग छवि, सादगी और जमीनी पकड़ पर भरोसा जताते हुए उन्हें शहडोल (अजजा) सीट से मैदान में उतारा, तो उन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज कर पहली बार संसद में कदम रखा।
- 2024 में अटूट विश्वास पर मुहर: 2024 के आम चुनाव में उन्होंने अपने काम और दूरगामी सोच के दम पर जनता का भरोसा फिर जीता। 3,97,000 से भी अधिक मतों के विशाल अंतर से मिली यह जीत इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि शहडोल की जनता अपनी इस बेटी पर कितना अटूट भरोसा करती है।
4. विज़न और धरातल: संसद से लेकर गांव की चौपाल तक की प्राथमिकताएं
हिमाद्री सिंह की कार्यशैली की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे खोखले दावों के बजाय मजबूत धरातलीय परिवर्तन में विश्वास रखती हैं:
- जनजातीय कल्याण व अधिकार: ‘जल, जंगल और जमीन’ के संरक्षण से लेकर प्रधानमंत्री जनमन योजना और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के प्रभावी क्रियान्वयन तक, उन्होंने आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए संसद में लगातार आवाज उठाई है।
- रेल व इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति: शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और कटनी जिलों में रेल सुविधाओं के विस्तार, नए ओवरब्रिज के निर्माण और लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव के लिए वे सीधे रेल मंत्रालय से समन्वय स्थापित करती रही हैं।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और बेटियाँ: दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना, सिक्ल सेल एनीमिया उन्मूलन अभियानों को गति देना और जनजातीय बेटियों के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के अवसर सुनिश्चित करना उनकी कार्ययोजना के केंद्र में है।
5. जन-मन को भाती सादगी: पद से बड़ा जन-सरोकार
दिल्ली के नीतिगत गलियारों में शहडोल की बात प्रमुखता से रखने के बाद जैसे ही हिमाद्री सिंह अपने क्षेत्र लौटती हैं, वे एक आम जन प्रतिनिधि के रूप में गांव-गांव के दौरे पर निकल पड़ती हैं। किसी झोपड़ी के आंगन में बैठकर बुजुर्गों से उनका हाल पूछना हो, महिलाओं के साथ उनकी समस्याओं पर संवाद करना हो या युवाओं के सुझाव सुनना—उनका सहज, निष्कपट और अपनत्व भरा व्यवहार ही उन्हें हर दिल का अज़ीज़ बनाता है।
“पद, प्रतिष्ठा और चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन अपने क्षेत्र के लोगों के चेहरे पर एक मुस्कान ला पाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना ही मेरी वास्तविक पूँजी है।”
— हिमाद्री सिंह, सांसद (शहडोल)
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