कलेक्ट्रेट में सजा ‘बिहान’ का बाजार : पहले ही दिन 40 हजार से अधिक के बिके उत्पाद

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स्थानीय दीदियों के हुनर से रोशन होगी दीपावली; कलेक्टर, एसपी और सीईओ ने खरीदारी कर बढ़ाया स्व-सहायता समूहों का हौसला

नई पहल न्यूज नेटवर्क। सारंगढ़–बिलाईगढ। दीपावली के पावन पर्व के बीच मंगलवार को सारंगढ़ कलेक्ट्रेट परिसर में बिहान योजना की दीदियों द्वारा तैयार उत्पादों की गूंज और चमक देखने को मिली। स्व-सहायता समूहों की आत्मनिर्भरता और हुनर को मंच देने के लिए सजाए गए इन स्टॉलों पर पहले ही दिन जबरदस्त रुझान मिला और महिलाओं ने 40 हजार 840 रुपए के उत्पादों की सीधी बिक्री की।

कलेक्ट्रेट परिसर में लगे इन स्टॉलों में मिट्टी के तराशे हुए दीपक, शुद्ध रुई की बातियाँ, पारंपरिक मिठाइयाँ, पूजा सामग्री, कलात्मक सजावटी सामान और बाँस से बनी हस्तनिर्मित वस्तुओं का शानदार संग्रह उपलब्ध कराया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने खरीदारी कर बढ़ाया दीदियों का उत्साह

​स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों के स्वरोजगार को बढ़ावा देने और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ने की पहल के तहत लगे इन स्टॉलों में जिले के आला अधिकारियों ने पहुंचकर जमकर खरीदारी की:

  • ​कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने स्टॉलों का निरीक्षण कर दीदियों से उनके उत्पादों और निर्माण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली। स्वयं खरीदारी करते हुए उन्होंने अधिकारियों एवं आम नागरिकों से अपील की कि वे दीपावली व अन्य अवसरों पर बिहान की दीदियों द्वारा बनाए गए स्वदेशी सामानों को प्राथमिकता दें, जिससे उनकी आजीविका को मजबूती मिले। उन्होंने परिसर में नियमित रूप से स्टॉल लगाने की दिशा में प्रयास करने की बात भी कही।
  • ​पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने स्टॉल से पारंपरिक मिठाइयाँ, दीये और पूजा बातियाँ खरीदीं तथा महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।
  • जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋषिकेश तिवारी सहित जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी विभिन्न स्टॉलों से उत्पाद खरीदकर समूहों का उत्साहवर्धन किया।

परंपरा और कौशल की झलक: क्या-क्या रहा खास ?

  • ​रोशनी संकुल संगठन: मिट्टी के आकर्षक दीपक, स्वादिष्ट पेड़ा, शुद्ध देशी गाय का घी, सजावटी झालर और पर्दे।
  • ​साथी आजीविका केंद्र: घर का बना अचार, सजी-धजी पूजा थाली, गिफ्ट टोकरी, हस्तनिर्मित साबुन और रुई की बातियाँ।
  • ​तुलसी समूह (भाटाकोना): बाँस से तैयार पारंपरिक हस्तनिर्मित झाड़ू, टोकरी, सूपा और पर्री जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुएँ।

​दीपावली के इस त्योहारी सीजन में कलेक्ट्रेट में मिले इस समर्पित मंच ने महिला उद्यमियों को न केवल एक बड़ा बाजार प्रदान किया है, बल्कि उनकी मेहनत और हुनर को नई पहचान भी दी है।

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