अस्वस्थता के बावजूद भरतपुर-सोनहत की प्राथमिकताओं पर अडिग विधायक, बजट बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था सुधारने की रखी बड़ी मांग
नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया। जनसेवा के प्रति समर्पण जब अटूट हो, तो शारीरिक बाधाएं भी आड़े नहीं आतीं। भरतपुर-सोनहत की विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने इसे चरितार्थ कर दिखाया है। हाल ही में सोनहत में आयोजित शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन पैर में आई मोच और चोट के कारण वे अस्वस्थ हैं, जिस वजह से वे सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की महत्वपूर्ण बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकीं।
लेकिन, क्षेत्र के विकास की चिंता उन्हें आराम करने नहीं दे रही थी। अपनी अनुपस्थिति में उन्होंने अपने निज सहायक मनोज शुक्ला को अपना प्रतिनिधि बनाकर बैठक में भेजा और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष भरतपुर-सोनहत की तरक्की का पूरा रोडमैप प्रस्तुत करवाया।
प्रतिनिधि के माध्यम से रखी गईं ये प्रमुख मांगें:
1. बजट में ₹25 करोड़ की अतिरिक्त बढ़ोत्तरी
विधायक की ओर से मुख्यमंत्री जी से विशेष आग्रह किया गया कि भरतपुर-सोनहत की भौगोलिक स्थिति और विकास की जरूरतों को देखते हुए सरगुजा विकास प्राधिकरण का निर्धारित बजट ₹50 करोड़ से बढ़ाकर ₹75 करोड़ किया जाए। इस मांग पर मुख्यमंत्री जी ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए इसे वित्त विभाग के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है।



2. ‘ड्रॉपआउट’ संकट का स्थायी समाधान: छात्रावासों का निर्माण
क्षेत्र के सुदूर वनांचलों में स्कूलों की दूरी अधिक होने के कारण बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं। विधायक रेणुका सिंह के सुझाव पर शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने निर्देश दिए हैं कि:
- दूरस्थ क्षेत्रों में नए छात्रावास बनाए जाएं।
- बच्चों को आवासीय सुविधा देकर उनकी पढ़ाई की निरंतरता सुनिश्चित की जाए।
- कलेक्टर को इस संबंध में तत्काल प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
3. कॉलेजों में फैकल्टी की कमी पर सीधा प्रहार
केल्हारी और सोनहत के महाविद्यालयों में शिक्षकों (फैकल्टी) की भारी कमी है, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य अधर में है। विधायक ने अपने संदेश में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिस पर सरकार ने आगामी वित्त सत्र में नई नियुक्तियों का भरोसा दिलाया है।
चोटिल पैर, पर संकल्प अडिग
ज्ञात हो कि शिव महापुराण कथा के समापन पर पैर में आई मोच के कारण डॉक्टरों ने विधायक रेणुका सिंह को विश्राम की सलाह दी है। बावजूद इसके, उन्होंने डिजिटल माध्यमों और अपने प्रतिनिधि के जरिए शासन-प्रशासन पर दबाव बनाए रखा कि उनके क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा और विकास कार्यों में कोई कोताही न बरती जाए।
“मेरे लिए राजनीति नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता की सेवा सर्वोपरि है। पैर की चोट मुझे बैठक में जाने से रोक सकती है, लेकिन अपने क्षेत्र की आवाज मुख्यमंत्री जी तक पहुँचाने से नहीं।”
रेणुका सिंह (विधायक, भरतपुर-सोनहत)




