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खाकी का गौरव : ‘ट्रैफिक मैन’ महेश मिश्रा के नाम अब जुड़ेगा ‘डॉक्टर’ का तमगा, मिली पीएचडी की उपाधि

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राष्ट्रपति पदक विजेता हवलदार ने यातायात जागरूकता पर किया ऐतिहासिक शोध : तीन विषयों में गोल्ड मेडल के बाद अकादमिक जगत में एक और बड़ी उड़ान

नई पहल न्यूज नेटवर्क। अंबिकापुर/कोरिया। विगत दो दशकों से सड़क पर लोगों की जिंदगी महफूज करने के लिए ‘यातायात जागरूकता अभियान’ चलाने वाले छत्तीसगढ़ के मशहूर ट्रैफिक मैन और राष्ट्रपति पदक से सम्मानित हवलदार महेश मिश्रा के नाम अब एक और बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। डॉ. महेश मिश्रा को संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा (अंबिकापुर) द्वारा समाजशास्त्र विषय में ‘डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी’ (Ph.D.) की मानद उपाधि प्रदान की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले में यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता पर किए गए उनके महत्वपूर्ण एवं समाजोपयोगी शोध कार्य के आधार पर उन्हें इस सर्वोच्च अकादमिक उपाधि से नवाजा गया है।

गौरतलब है कि डॉ. मिश्रा सिर्फ खाकी में ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अव्वल रहे हैं। वे इससे पहले एम.ए. संस्कृत, राजनीति विज्ञान एवं समाजशास्त्र तीनों ही विषयों में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान हासिल कर ‘स्वर्ण पदक’ (Gold Medal) जीत चुके हैं।

क्या है शोध का विषय और क्यों है यह खास ?

​डॉ. महेश मिश्रा ने अपना शोध कार्य “यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता का अध्ययन: छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले के विशेष संदर्भ में” विषय पर पूर्ण किया है।

  • महत्व: वर्तमान समय में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए यह शोध सड़क सुरक्षा, यातायात अनुशासन एवं जन-जागरूकता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • अध्ययन का दायरा: शोध के दौरान कोरिया जिले के नागरिकों और सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, नियमों के पालन की वर्तमान स्थिति, दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों तथा सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक सुझावों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विस्तृत अध्ययन किया गया है।
  • वैज्ञानिक पद्धति: वर्ष 2019 में प्री-पीएचडी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, उन्होंने 2021-22 में कोर्स वर्क किया और 2023 में शोध शीर्षक का पंजीयन कराया। दीर्घकालीन अध्ययन, क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक शोध पद्धति के माध्यम से इस कार्य को पूरा कर जून 2026 में उन्होंने अंतिम मौखिक परीक्षा (वाइवा) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की।

विद्वानों ने सराहा: ‘मानव समाज के लिए अत्यंत लाभकारी’

​इस ऐतिहासिक शोध कार्य का निर्देशन श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र नाथ शर्मा द्वारा किया गया। वहीं, बाह्य परीक्षक के रूप में मध्य भारत सोशियोलॉजी संगठन के अध्यक्ष और ख्यातिलब्ध विद्वान प्रो. महेश शुक्ला ने शोध का मूल्यांकन किया।

​”वर्तमान समय में यातायात नियमों की जानकारी एक अत्यंत ही आवश्यक पहलू है। डॉ. मिश्रा द्वारा किया गया यह शोध समाजोपयोगी है और निश्चित रूप से मानव समाज के लिए मील का पत्थर साबित होगा।”

प्रो. महेश शुक्ला (बाह्य परीक्षक)

​इस शोध कार्य के दौरान शासकीय राज मोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर डॉ. मिश्रा का शोध केंद्र रहा।

डॉ. मिश्रा ने जताया सबका आभार

​अपनी इस सफलता पर डॉ. महेश मिश्रा ने भावुक होते हुए विगत 7 वर्षों में मिले अतुलनीय सहयोग के लिए अपने माता-पिता, परिवार, गुरुजनों के साथ-साथ प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने विशेष रूप से:

  • डीआईजी राजेश पाण्डेय, तत्कालीन कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, वर्तमान कलेक्टर रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे।
  • ​विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी, शोध समन्वयक डॉ. पीयूष पांडेय, प्राचार्य डॉ. एजेन टोप्पो और शोध समिति प्रमुख डॉ. विश्वासी एक्का।
  • ​जिला सेनानी संजय गुप्ता, यातायात प्रभारी बीरबल राजवाड़े, टंकण सहयोगी मो. आरिफ ढेवर सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, मीडिया जगत और कोरिया की जनता जनार्दन के प्रति कृतज्ञता प्रकट की है।

‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में दर्ज है नाम

​डॉ. महेश मिश्रा पिछले 20 वर्षों से समाज सेवा और यातायात जन जागरूकता अभियान में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने स्वयं के खर्च पर 500 से अधिक यातायात जागरूकता शिविर आयोजित किए हैं, जिसके माध्यम से 5 लाख से अधिक लोगों को यातायात नियमों, संकेतों एवं चिन्हों की जानकारी देकर अनमोल मानव जीवन को बचाने का पुनीत कार्य किया है। उनके इसी वृहद अभियान के लिए उनका नाम ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में भी दर्ज है।

​उनकी इस अद्वितीय उपलब्धि पर पुलिस महकमे के सहकर्मियों, मित्रों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। उनका यह शोध न केवल समाजशास्त्र के क्षेत्र में एक बड़ा योगदान है, बल्कि सड़क सुरक्षा की दिशा में भी मार्गदर्शक साबित होगा।

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