जांच में खुली पोल, 6 महीने के अस्थायी प्रमाण पत्र पर काट ली 17 साल की नौकरी, अब वेतन वसूली और जेल जाने की नौबत
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बैकुण्ठपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे शासकीय सेवा का लाभ ले रहे लोगों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की जांच में एक महिला सहायक शिक्षक का जाति प्रमाण पत्र ‘फर्जी’ पाया गया है। समिति के सख्त आदेश के बाद अब महिला शिक्षक की बर्खास्तगी की फाइल जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय पहुँच चुकी है। सूत्रों की मानें तो इसी सप्ताह सेवा समाप्ति का अंतिम आदेश जारी हो सकता है।
जांच में हुआ सनसनीखेज खुलासा
पूरा मामला नियुक्ति के समय किए गए खेल से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि महिला शिक्षक (तत्कालीन शिक्षाकर्मी वर्ग-3) ने नियुक्ति के समय तहसीलदार द्वारा जारी एक ‘अस्थायी’ जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, जिसकी वैधता केवल 6 माह थी। नियमों को ताक पर रखकर, बिना सत्यापन और वैधता की जांच किए, उन्हें 16-17 वर्षों तक विभाग में बनाए रखा गया। विभाग के इस ‘अंधेरे’ ने शासन को लाखों का चूना लगाया है।
वेतन रिकवरी और FIR की मांग: 17 साल की ‘कमाई’ होगी वापस?
शिकायतकर्ता ने केवल बर्खास्तगी ही नहीं, बल्कि अब तक शासन से लिए गए 17 वर्षों के वेतन की पाई-पाई वसूलने की मांग की है। आवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी लाभ लेने के इस कृत्य पर FIR दर्ज की जाए। जांच में यह भी विरोधाभास मिला कि महिला के पास छत्तीसगढ़ का अस्थायी और मध्य प्रदेश (बैतूल) का स्थायी प्रमाण पत्र था, जिसने फर्जीवाड़े की पुष्टि कर दी।
फर्जीवाड़े का ‘मास्टरमाइंड’ नेटवर्क आएगा सामने?
यह मामला केवल एक व्यक्तिगत फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं दिख रहा है। चर्चा है कि वर्ष 2008 के आसपास कोरिया जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरियां दिलाने का एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था। सूत्रों का दावा है कि यदि इस मामले की गहराई से जांच हुई, तो कई अन्य चेहरे बेनकाब होंगे और एक बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।



स्कूल में भी था ‘खराब’ ट्रैक रिकॉर्ड
आरोपों के घेरे में आई महिला शिक्षक पर केवल फर्जीवाड़े का ही दाग नहीं है, बल्कि ग्रामीणों ने उन पर स्कूल में देरी से आने और बच्चों से निजी काम कराने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। फिलहाल, DEO कोरिया द्वारा नियुक्तिकर्ता जनपद पंचायत से रिकॉर्ड तलब कर लिए गए हैं और प्रशासनिक गलियारों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।




