शर्मनाक ! सरगुजा संभाग की बेटी और विभागीय मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के रहते बेटियों के स्वाभिमान पर डकैती; रतनपुर सामूहिक विवाह में भ्रष्टाचार का ‘काला खेल’, पीड़ित कन्याओं ने खोला मोर्चा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ में सुशासन के दावों के बीच मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी घिनौनी और रूह कंपा देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सूबे के सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे संवेदनशील और गरीबों के संबल ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ को महिला एवं बाल विकास विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने अपनी अवैध कमाई की ‘चारागाह’ बना लिया है।
सबसे बड़ा और दुर्भाग्यपूर्ण विरोधाभास देखिए— प्रदेश की महिला एवं बाल विकास विभाग की कमान खुद कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के हाथों में है, जो इसी सरगुजा संभाग से आती हैं। जिस संभाग की बेटी खुद महिला सशक्तिकरण का चेहरा बनकर मंत्रालय संभाल रही हो, उसी संभाग के नाक के नीचे 189 गरीब बेटियों के अरमानों का गला घोंट दिया गया। रतनपुर में आयोजित सामूहिक विवाह में पवित्र बंधन के प्रतीक ‘मंगलसूत्र’ को चांदी की जगह कौड़ियों के भाव मिलने वाले ‘गिलेट’ (सस्ते और घटिया मेटल) का सप्लाई कर दिया गया।


बेटियों की आंखों में आंसू, जुबां पर ‘अफसरशाही’ का सच
विवाह के बाद जब नवविवाहिताओं के हाथों में उपहार और गले में मंगलसूत्र आया, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनके साथ इतना बड़ा धोखा हुआ है। जब गहनों की असलियत सामने आई, तो बेटियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मीडिया के सामने आकर अधिकारियों के इस काले कारनामे की कलई खोल कर रख दी।
मंत्री जी हमारे ही संभाग की हैं, वो खुद एक महिला हैं। हमें लगा था कि हमारे साथ न्याय होगा, लेकिन उनके राज में अफसरों ने हमारी शादी के पवित्र धागे तक को नहीं बख्शा। चांदी कहकर हमें नकली लोहा (गिलेट) पहना दिया गया। यह हमारी गरीबी का मज़ाक है।
— फूट-फूट कर रोती एक पीड़ित नवविवाहिता
भ्रष्टाचार का ‘पुराना गढ़’ है MCB का महिला बाल विकास विभाग
यह महा-घोटाला कोई अचानक हुई चूक नहीं है, बल्कि यह विभाग की रग-रग में बसे भ्रष्टाचार का नतीजा है। जिले का महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) शुरू से ही घोटालों और विवादों की ‘नर्सरी’ रहा है:
- विवादित भर्ती प्रक्रिया: विभाग में पदों की भर्ती से लेकर संविदा नियुक्तियों तक में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं और चहेतों को रेवड़ियों की तरह पद बांटे गए।
- कुख्यात ‘साड़ी विवाद’ की परछाई: इससे पहले प्रदेश में महिलाओं को बांटी जाने वाली साड़ियों की घटिया क्वालिटी और उसमें हुए करोड़ों के खेल ने सरकार की थू-थू कराई थी।
- सप्लाई का सिंडिकेट: नौनिहालों के रेडी-टू-ईट (पोषण आहार) से लेकर कन्याओं के विवाह किट तक, हर जगह अधिकारियों और ठेकेदारों का एक संगठित ‘सिंडिकेट’ राज कर रहा है।
तीखे सवाल: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े जी, कब कड़ेगा आपका ‘हंटर’ ?
सरगुजा संभाग की जनता और अपनी अस्मत के लिए लड़ रही ये 189 बेटियां आज सीधे रायपुर मंत्रालय की ओर देख रही हैं। सवाल सीधे विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री से हैं:
- क्या मंत्री जी को गुमराह किया गया? अगर नहीं, तो मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के अपने गृह संभाग में बेटियों के साथ इतना बड़ा छल करने की जुर्रत इन अफसरों में कहां से आई?
- FIR और जेल कब? क्या गरीब बेटियों के मंगलसूत्र का पैसा डकारने वाले इन जिला स्तर के अधिकारियों और सप्लायरों को सीधे जेल भेजा जाएगा या सिर्फ ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
- भरपाई कौन करेगा? इन पीड़ित बेटियों को उनका असली हक, शुद्ध चांदी का मंगलसूत्र और अधिकारियों के अहंकार से टूटे स्वाभिमान का इंसाफ कब और कैसे मिलेगा?
About The Author














