अपर कलेक्टर नम्रता आनंद डोंगरे को सौंपी गई जांच, विपक्ष ने भी जांच के लिए लिखा पत्र
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़ । मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 189 गरीब बेटियों को चांदी की जगह नकली ‘गिलेट’ का मंगलसूत्र थमाए जाने के बाद जब जिले की सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर संतन देवी जांगड़े से इस पर सवाल पूछा गया। ‘नई पहल’ ने इस मिलावट और धोखेबाजी को लेकर कलेक्टर से सीधी कार्रवाई पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा— “मंगलसूत्र चांदी का ही देना है, यह कहीं नहीं लिखा है।” हालांकि, मामले को तूल पकड़ता देख कलेक्टर ने आनन-फानन में इस पूरे प्रकरण की जांच अपर कलेक्टर नम्रता आनंद डोंगरे को सौंप दी है। वहीं, इस मामले को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ ने भी कलेक्टर को पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
सुहाग के प्रतीक पर ऐसी दलील
भारतीय संस्कृति में मंगलसूत्र कोई साधारण आभूषण नहीं, बल्कि एक नारी के अस्मत, सम्मान और सुहाग की सबसे बड़ी निशानी है। ऐसे में महिला कलेक्टर का यह कहना कि ‘कहीं नहीं लिखा कि चांदी ही देना है’, यह दर्शाता है कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही या घोटाले को कितनी सहजता से ले रहा है।
मंत्री से लेकर कलेक्टर तक ‘महिला नेतृत्व’, फिर भी बेटियों के साथ ऐसा छल!
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दुखद और विरोधाभासी पहलू यह है कि इस व्यवस्था के शीर्ष पर महिलाएं ही बैठी हैं:
- विभागीय मंत्री महिला: महिला एवं बाल विकास विभाग की कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े खुद इसी सरगुजा संभाग से आती हैं।
- कलेक्टर महिला: जिले की कमान खुद महिला कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के हाथों में है।
- जांच अधिकारी महिला: पूरे मामले की जांच भी अब एक महिला अफसर (अपर कलेक्टर नम्रता आनंद डोंगरे) को सौंपी गई है।
इसके बावजूद, 184 लाचार और गरीब बेटियों के भरोसे के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ हो गया। विवादित भर्ती प्रक्रियाओं और पूर्व के कुख्यात ‘साड़ी विवाद’ के लिए पहले से ही सुर्खियों में रहा मनेन्द्रगढ़ का महिला बाल विकास विभाग अब सीधे बेटियों के स्वाभिमान पर चोट कर रहा है, और जिम्मेदार अधिकारी नियमों की आड़ ले रहे हैं।
‘नई पहल’ के तीखे और सीधे सवाल:
- अगर चांदी नहीं, तो टेंडर में क्या था? जब कलेक्टर साहिबा कह रही हैं कि ‘कहीं नहीं लिखा कि चांदी ही देना है’, तो फिर टेंडर में किस धातु का मंगलसूत्र देने का आदेश जारी हुआ था? क्या प्रशासन ने जानबूझकर नकली ‘गिलेट’ बांटने की मंजूरी दी थी?
- भरपाई कौन करेगा? उन 184 लाचार बेटियों के भरोसे और सुहाग की निशानी के साथ जो भद्दा मजाक हुआ है, उसकी नैतिक जिम्मेदारी कौन लेगा और उन्हें उनका असली हक कब मिलेगा ?
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