बड़ा संदेश : एक ने 57वीं एनिवर्सरी पर तीन पीढ़ियों को ‘रक्तवीर’ बनाकर रचा इतिहास, तो दूसरे ने बिना मुहूर्त देखे संकट के बीच मासूम को सौंप दीं अपनी सांसें। विश्व रक्तदाता दिवस पर समाज को आईना दिखाती दो प्रेरक कहानियां
विश्व रक्तदाता दिवस विशेष
रविकांत सिंह राजपूत। मनेंद्रगढ़। क्या किसी की एनिवर्सरी या संकट में पड़ी किसी मासूम की जान, बिना लाखों रुपए फूंकने वाले तामझाम के भी दुनिया का सबसे बड़ा ‘उत्सव’ बन सकती है ? आज के इस घोर भौतिकवादी दौर में जहाँ खुशियों का पैमाना सिर्फ महंगी पार्टियां और फिजूलखर्ची रह गया है, वहीं मनेंद्रगढ़ के दो प्रतिष्ठित व्यवसायी परिवारों ने इस खोखले स्टेटस सिंबल को तमाचा मारते हुए मानवता की एक ऐसी अनूठी इबारत लिखी है, जिसकी गूंज पूरे देश में है। विश्व रक्तदाता दिवस पर, इन परिवारों ने साबित कर दिया कि असली संतोष दिखावे के शोर में नहीं, बल्कि किसी की डूबती सांसों को सहारा देने में मिलता है। जैन परिवार की तीन पीढ़ियों ने जहाँ भौगोलिक दूरियों को मिटाकर एक ही दिन में 15 यूनिट रक्तदान का महा-रिकॉर्ड स्थापित कर दिया, वहीं गोयल परिवार ने किसी विशेष शिविर या तारीख का इंतजार किए बिना, शासकीय अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही एक नन्ही बच्ची के लिए अपने घर के दरवाजे खोल दिए। यह सिर्फ रक्तदान नहीं, बल्कि समाज की सोई हुई चेतना को जगाने वाली एक ऐसी मानवीय क्रांति है, जो आज के युवाओं को बदलाव का असली रास्ता दिखाती है। नई पहल पर पढ़िए दो रक्तदाता परिवार की कहानी
केस 1: जैन परिवार का महा-संकल्प

मनेंद्रगढ़ के संपन्न व्यवसायी अमर चंद जैन और प्रेम लता जैन की 57वीं विवाह वर्षगांठ इतिहास में दर्ज हो गई। आज के भौतिकवादी युग में जहाँ शादियों की सालगिरह पर लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिए जाते हैं, वहीं इस जैन परिवार ने फिजूलखर्ची त्याग कर ‘जीवन दान’ का संकल्प लिया।
परिवार के 15 सदस्यों ने एक ही दिन रक्तदान कर न केवल इस दिन को यादगार बनाया, बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इस मुहिम में देश के अलग-अलग शहरों में रह रहे सदस्य भी शामिल हुए। जयपुर से बड़ी बहू प्रवीणा जैन, बड़ी पोती हर्षिता और पोता अक्षय जैन ने वहीं रक्तदान किया। बेटी आरती बैद और दामाद अजीत बैद ने चंडीगढ़ में ब्लड डोनेट कर माता-पिता को अनोखा सम्मान दिया। स्थानीय केंद्रीय चिकित्सालय में बेटे पंकज, प्रवीण, प्रदीप, बहुएं कविता, ललिता व पोते-पोतियां कुशाग्र, निपुण, हितैषी, प्रार्थना व दृष्टि जैन ने एकजुट होकर फर्ज निभाया। ब्लड बैंक में केक काटकर इस परिवार ने संदेश दिया कि खुशियां बांटने से ही बढ़ती हैं।
केस 2 : गोयल परिवार का त्वरित एक्शन

कहते हैं कि सेवा का जज्बा अगर दिल में हो, तो किसी खास मुहूर्त या कैलेंडर की तारीख की जरूरत नहीं होती। मनेंद्रगढ़ के प्रतिष्ठित व्यवसायी और मारवाड़ी युवा मंच के अध्यक्ष मनीष गोयल एवं उनके परिवार ने इसे सच कर दिखाया है। अक्सर लोग रक्तदान के लिए किसी विशेष शिविर का इंतज़ार करते हैं, लेकिन इस परिवार ने साबित किया कि जीवन बचाना ही सबसे बड़ा उत्सव है।
शहर के शासकीय अस्पताल में जब एक नन्ही बच्ची को खून की सख्त जरूरत पड़ी, तो गोयल परिवार ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। मनीष गोयल के बड़े भाई मयंक गोयल को जैसे ही सूचना मिली कि ब्लड बैंक में O पाजिटिव ग्रुप की कमी है और बच्ची की जान जोखिम में है, परिवार बिना वक्त गंवाए अस्पताल की ओर निकल पड़ा। ब्लड बैंक में मनीष गोयल के साथ उनके चाचा संतोष गोयल, भाई मयंक गोयल और प्रतीक गोयल ने पहुंचकर सामूहिक रक्तदान किया। यह कदम युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।
19 यूनिट = 57 जिंदगियां

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के सीएमएचओ डॉक्टर अविनाश खरे के मुताबिक, दोनों परिवारों द्वारा दिए गए कुल 19 यूनिट रक्त से ब्लड बैंक का संकट तो दूर हुआ ही, साथ ही कुल 57 जरूरतमंद मरीजों को नया जीवनदान मिलेगा।
एक्सपर्ट व्यू
एमसीबी जिले के सीएमएचओ डॉक्टर अविनाश खरे के मुताबिक
1 यूनिट = 3 जिंदगियां: डॉक्टरों के अनुसार, एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है।
जैन परिवार (15 यूनिट): कुल 45 लोगों को मिलेगा नया जीवनदान।
गोयल परिवार (4 यूनिट): कुल 12 लोगों की सांसों को मिलेगी नई जिंदगी।
मिथक टूटेगा: जैन और गोयल परिवार की इस सामूहिक पहल से समाज में यह जागरूकता आएगी कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है।
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