खून-पसीने की कमाई पर चलने नहीं दूंगी बुलडोजर – जनकपुर में वन विभाग के खिलाफ सुखमंती सिंह का हल्लाबोल
नई पहल न्यूज नेटवर्क। जनकपुर। एक तरफ सरकार गरीबों को पट्टा देने और उनके उत्थान के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के मैदानी अमले की ‘दोहरी नीति’ ने जनता में भारी आक्रोश भर दिया है। जनकपुर क्षेत्र में बीते 20 वर्षों से बने मकानों को ढहाने पहुँचे वन विभाग की टीम को उस वक्त पीछे हटना पड़ा, जब जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थाई समिति की सभापति सुखमंती सिंह ने मौके पर पहुँचकर मोर्चा संभाल लिया।
श्रीमती सिंह ने न केवल विभागीय कार्रवाई को रुकवाया, बल्कि SDO (वन विभाग) को दो टूक शब्दों में सख्त हिदायत देते हुए विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
“जब तक पैसा मिलता है, तब तक अतिक्रमण नहीं दिखता”
सुखमंती सिंह ने वन विभाग के भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि जब कोई गरीब व्यक्ति वन भूमि पर अतिक्रमण करता है, तब विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ‘मूकदर्शक’ बने रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- जब तक गरीब अपनी गाढ़ी कमाई से पैसे अधिकारियों को देता रहता है, तब तक निर्माण सुरक्षित रहता है।
- जैसे ही पैसे का लेन-देन बंद होता है, विभाग को ‘कानून’ याद आ जाता है और बुलडोजर लेकर गरीबों के घर गिराने पहुँच जाते हैं।
खुद के घर वन भूमि पर, फिर गरीबों पर गाज क्यों ?
सभापति ने विभाग के दोगलेपन को उजागर करते हुए सनसनीखेज दावा किया कि जनकपुर में ही कई वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खुद के मकान वन भूमि और राजस्व भूमि पर बने हुए हैं। उन्होंने दहाड़ते हुए सवाल किया:



अगर कानून सबके लिए बराबर है, तो पहले उन अधिकारियों के घरों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती ? क्या नियम केवल गरीबों को प्रताड़ित करने के लिए बनाए गए हैं?
सरकार की दोहरी नीति में पिस रही जनता
सुखमंती सिंह ने वर्तमान सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकार गरीबों को पट्टा देने का ‘राग’ अलापती है, वहीं दूसरी तरफ पुराने कब्जों पर इस तरह की तानाशाही कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट मांग की है कि:
- पट्टा वितरण: जो लोग वर्षों से काबिज हैं, उन्हें उजाड़ने के बजाय पट्टा दिया जाए।
- समान कार्रवाई: यदि कार्रवाई होनी है, तो वह सबसे पहले उन रसूखदारों और अधिकारियों पर हो जिन्होंने सरकारी भूमि पर कब्जा कर रखा है।
- तानाशाही पर रोक: गरीबों के आशियाने उजाड़ने की यह तानाशाही कार्रवाई तत्काल बंद होनी चाहिए।
क्षेत्र में बढ़ा तनाव, सभापति के तेवरों से अधिकारी पस्त
मौके पर सुखमंती सिंह के कड़े रुख के बाद वन विभाग की टीम को बैरंग लौटना पड़ा। क्षेत्र की जनता ने सभापति के इस साहसी कदम की सराहना की है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग अपने ही महकमे के रसूखदारों पर कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पाता है या केवल गरीबों को निशाना बनाना ही उसकी नीति बनी रहेगी।




