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बिग ब्रेकिंग : संसद में ‘नारी शक्ति’ बिल ढेर : मोदी सरकार पहली बार बिल पास कराने में रही नाकाम, दो-तिहाई बहुमत जुटाने में रही नाकाम !

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पहली बार बैकफुट पर NDA : 298 पक्ष में, 230 विरोध में, आंकड़ों के खेल में गिर गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक

नई पहल न्यूज नेटवर्क। नई दिल्ली। भारतीय संसदीय इतिहास में आज का दिन मोदी सरकार के लिए किसी बड़े राजनीतिक सदमे से कम नहीं रहा। लोकसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026 को पास कराने में सरकार विफल रही। सत्ता पक्ष के तमाम प्रयासों के बावजूद बिल को पास कराने के लिए जरूरी ‘दो-तिहाई बहुमत’ का आंकड़ा नहीं मिल सका।

​प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब किसी इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन को पारित कराने में सरकार को सदन के भीतर पराजय का सामना करना पड़ा है।

वोटिंग का ‘डेथ मीटर’: क्यों और कैसे गिरा बिल?

संसद के विशेष सत्र में आज शाम 7:30 बजे के करीब हुई वोटिंग के आंकड़े चौंकाने वाले रहे। संविधान संशोधन के लिए सदन में उपस्थित सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई (66.6%) समर्थन अनिवार्य था, लेकिन सरकार इस जादुई आंकड़े से 48 वोट दूर रह गई।

विपक्ष की ‘दक्षिण’ रणनीति ने पलटा पासा

विपक्ष, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के सांसदों ने इस बिल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे “दक्षिणी और छोटे राज्यों की आवाज दबाने वाली साजिश” करार दिया। विपक्ष का मुख्य विरोध बिल में जुड़ी की शर्त को लेकर था, जिसके तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था। विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों (दक्षिण भारत) की सीटें कम हो जाएंगी और उत्तर भारत का वर्चस्व बढ़ जाएगा।

वोटिंग का पूरा गणित

  • कुल उपस्थित सांसद: 528
  • बिल के पक्ष में वोट: 298
  • बिल के विरोध में वोट: 230

“आज सदन में हुई वोटिंग के दौरान कुल 528 सांसद उपस्थित थे। संविधान संशोधन के नियमों के मुताबिक, बिल पास कराने के लिए 326 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार केवल 298 वोट ही जुटा पाई। विपक्ष के 230 वोटों ने सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

गृह मंत्री का भरोसा भी नहीं आया काम

​वोटिंग से ठीक पहले गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में स्पष्ट किया था कि दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। लेकिन विपक्ष ‘कोटा के भीतर कोटा’ (OBC आरक्षण) और तत्काल क्रियान्वयन की मांग पर अड़ा रहा, जिसके कारण वोटिंग के दौरान सरकार को हार का सामना करना पड़ा।

क्या होगा इसका असर ?

  1. 2029 का सपना अधर में: सरकार इस संशोधन के जरिए 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करना चाहती थी, जो अब कानूनी पेच में फंस गया है।
  2. सरकार की साख: पूर्ण बहुमत वाली सरकार का बिल गिरना विपक्षी एकता की बड़ी जीत माना जा रहा है।
  3. अब क्या रास्ता? सरकार को अब या तो विपक्षी दलों के साथ आम सहमति बनानी होगी या फिर इस बिल को नए स्वरूप में फिर से पेश करना होगा।

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