सतनामी कलाकार संगठन ने दी दस्तक; विधायक शेषराज हरबंश, पद्मश्री डॉ. उषा बारले, मोना सेन सहित शीर्ष कलाकारों और सामाजिक दिग्गजों की मौजूदगी में लिया आशीर्वाद
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और बाबा गुरु घासीदास जी के संदेशों को वैश्विक पहचान दिलाने वाले महान अंतर्राष्ट्रीय पंथी कलाकार, स्व. देवदास बंजारे जी के स्मृति दिवस (26 अगस्त 2026) पर एक भव्य इतिहास रचने की तैयारी है। इस गौरवशाली अवसर पर आयोजित होने वाले ‘प्रदेश स्तरीय सतनाम पंथी महोत्सव’ के लिए भव्य तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। इसी कड़ी में सतनामी कलाकार संगठन के नेतृत्व में प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व और राजनेताओं को सादर आमंत्रित कर इस महाआयोजन के लिए उनका आशीर्वाद लिया गया।

मुख्यमंत्री सहित दिग्गज नेताओं को मिला न्योता
महोत्सव की गरिमा को बढ़ाने के लिए संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने सूबे के माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से मुलाकात कर उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में सादर आमंत्रित किया। इसके साथ ही लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभ नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, पामगढ़ विधायक शेषराज हरबंश और कला जगत से राजनीति में अमिट छाप छोड़ने वाले धरसींवा विधायक अनुज शर्मा को भी आमंत्रित किया गया। सभी दिग्गजों ने आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए आयोजन की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं और आशीर्वाद प्रदान किया।

कला जगत और समाज के दिग्गजों की रही गरिमामयी मौजूदगी
इस विशेष आमंत्रण यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ी संस्कृति, कला और समाज के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आए। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सतनामी कलाकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हृदय प्रकाश अनंत ने किया।
- पद्मश्री डॉ. उषा बारले (अंतर्राष्ट्रीय पंथी एवं पंडवानी कलाकार)
- मोना सेन (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम)
- शिवा जांगड़े, द्वारिका बर्मन, चन्दन बांधे (विशिष्ट कलाकार)
- राजमहंत सुखचंद भाष्कर, शशि सतनामी
- पंडित राम जोशी, कृष्णा रात्रे एवं समाज के अन्य वरिष्ठ कलाकार व सामाजिक बंधु उपस्थित रहे।
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”स्व. देवदास बंजारे जी ने पंथी नृत्य को सात समंदर पार पहचान दिलाई थी। उनकी स्मृति में आयोजित यह प्रदेश स्तरीय महोत्सव न सिर्फ उन्हें एक सच्ची श्रद्धांजलि होगा, बल्कि राज्य के कोने-कोने से आने वाले पंथी कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करेगा।”
— सतनामी कलाकार संगठन
यह आयोजन छत्तीसगढ़ की लोक कला, आस्था और सामाजिक समरसता का एक अनूठा संगम बनने जा रहा है, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई देगी।
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