युवाओं के ‘आइकन’ से प्रदेश के ‘खजांची’ बनने की पूरी कहानी
नई पहल न्यूज नेटवर्क।रायपुर। जब कोई शख्स ऊंचे ओहदों की कुर्सी और लाल बत्ती के रुतबे को महज इसलिए त्याग दे कि उसे अपनी माटी की तकदीर बदलनी है, तो वह केवल नेता नहीं, जननायक बन जाता है। रायगढ़ की गलियों से निकलकर देश की सबसे कठिन ‘यूपीएससी’ परीक्षा को 23 साल की उम्र में फतह करने वाले ओपी चौधरी आज छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के सारथी हैं। एक पूर्व आईएएस की अनुशासनप्रियता और एक राजनेता की संवेदनशीलता के साथ, वे छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नए युग की इबारत लिख रहे हैं।
1. दंतेवाड़ा का ‘एजुकेशन हब’ और वो प्राइम मिनिस्टर अवार्ड
एक दौर था जब दंतेवाड़ा केवल नक्सली हमलों के लिए जाना जाता था। बतौर कलेक्टर ओपी चौधरी ने वहां बंदूकों की गूंज के बीच किताबों की खुशबू बिखेरी। उन्होंने वहां ‘एजुकेशन सिटी’ का ऐसा मॉडल खड़ा किया कि दिल्ली भी हैरान रह गई। इसी विजन के लिए उन्हें ‘पीएम अवार्ड’ से नवाजा गया, जो किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए शिखर सम्मान है।
2. त्याग का साहस: जब ‘पावर’ से ज्यादा ‘पीपल’ को चुना
साल 2018 में अपनी सेवा के चरम पर रहते हुए, जब वे रायपुर के कलेक्टर थे, उन्होंने आईएएस की सुरक्षित नौकरी से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन उनका विजन स्पष्ट था— प्रशासन से सिस्टम को सुधारा जा सकता है, पर व्यवस्था परिवर्तन केवल राजनीति से ही संभव है।
3. हार ने निखारा, जीत ने इतिहास रचा
2018 के विधानसभा चुनाव में हार मिलने के बावजूद वे पीछे नहीं हटे। पांच साल तक उन्होंने जमीन पर पसीना बहाया। नतीजा यह हुआ कि 2023 के चुनाव में रायगढ़ की जनता ने उन्हें ऐतिहासिक बहुमत देकर विधानसभा भेजा। आज वे प्रदेश के वित्त मंत्री के तौर पर राज्य के खजाने की चाबी संभाल रहे हैं।
4. डिजिटल गवर्नेंस और ‘रिफॉर्म’ का नया चेहरा
वित्त मंत्री के रूप में ओपी चौधरी का फोकस ‘टेक्नोलॉजी ड्रिवेन गवर्नेंस’ पर है। वे पुराने ढर्रे को बदलकर भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी छत्तीसगढ़ बनाने के मिशन पर हैं। उनका बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने का एक ‘रोडमैप’ नजर आता है।
क्यों खास हैं ओपी चौधरी ? (एक नजर में)
प्रशासनिक अनुभव: सरकारी फाइलों और सिस्टम की बारीकियों की गहरी समझ।
युवा आइकन: प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए एक प्रेरणास्रोत और ‘मेंटोर’ की भूमिका।
ईमानदार छवि: राजनीति में सादगी और स्पष्टवादिता के लिए मशहूर।
विजनरी सोच: शिक्षा, स्वास्थ्य और आईटी के जरिए छत्तीसगढ़ के कायाकल्प का संकल्प।
कलेक्टर रहते हुए मैंने एक जिले की सेवा की, अब जनप्रतिनिधि बनकर मुझे पूरे छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारने का सौभाग्य मिला है। मेरा लक्ष्य केवल कुर्सी नहीं, व्यवस्था का आधुनिकीकरण है।
प्रधान संपादक | रविकांत सिंह राजपूत | बीते 15 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय। शुरुआत स्वदेश अखबार भोपाल से। हरिभूमि रायपुर में रिपोर्टर के पद पर कार्यरत। मनेन्द्रगढ़ में नईदुनिया और inh न्यूज़ चैनल में रिपोर्टिंग। बेहतर रिपोर्टिंग के लिए बच्चों के लिए कार्य करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ का मीडिया फॉर चिल्ड्रेन अवार्ड से सम्मानित।