रेडक्रास प्रदेश प्रतिनिधि रामनरेश पटेल ने मुख्यमंत्री को दिया ‘कच्चा चिट्ठा’, जांच न होने पर उग्र आंदोलन की दी कड़ी चेतावनी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़। जिला एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष एवं रेडक्रास सोसायटी के प्रदेश प्रतिनिधि, अधिवक्ता रामनरेश पटेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को कोरिया दौरे के दौरान बैकुंठपुर में पत्र सौंपकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अविनाश खरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

‘सिस्टम के रक्षक पर ही लगा फर्जीवाड़े का संगीन आरोप’
क्या एक जिला स्वास्थ्य अधिकारी खुद को बचाने के लिए ‘फर्जी’ दस्तावेजों का सहारा ले सकता है? यह सवाल अब मनेन्द्रगढ़ की फिजाओं में गूंज रहा है। रेडक्रास के प्रदेश प्रतिनिधि रामनरेश पटेल ने डॉ. अविनाश खरे पर 55% के फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र के जरिए कानून को गुमराह करने और विभाग में करोड़ों की आर्थिक अनियमितता का सनसनीखेज आरोप लगाया है।


1. विकलांगता प्रमाण पत्र की निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायत का सबसे गंभीर पहलू डॉ. खरे का 55 प्रतिशत विकलांगता प्रमाण पत्र है। अधिवक्ता पटेल का आरोप है कि डॉ. खरे ने यह प्रमाण पत्र केवल उच्च न्यायालय से जमानत प्राप्त करने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अनुचित तरीके से बनवाया है। इसकी उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड से जांच की मांग की गई है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।



2. रिश्वत कांड और जेल की पृष्ठभूमि
सीएम को सौंपे गए पत्र में डॉ. खरे के पुराने ‘दागी’ रिकॉर्ड का भी खुलासा किया गया है। आरोप है कि 2019 में बिलासपुर में पदस्थापना के दौरान डॉ. खरे को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था, जिसके बाद उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। ऐसे पृष्ठभूमि वाले अधिकारी को जिले की कमान सौंपना सवालों के घेरे में है।
3. करोड़ों का ‘फर्जी बिल’ घोटाला
वर्तमान पदस्थापना के दौरान डॉ. खरे पर करोड़ों रुपये के फर्जी बिल बनवाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग करने का आरोप है। नियमों के विरुद्ध खरीदी और बजट को हड़पने की साजिश के कारण जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर पहुंच गई है।
4. बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और मनमानी नियुक्तियां
- स्टाफ की कमी: 220 बिस्तर वाले मनेन्द्रगढ़ अस्पताल में नर्सों की भारी कमी है, फिर भी डॉ. खरे ने चहेती स्टाफ नर्स को अपने कार्यालय में ‘अटैच’ कर रखा है।
- नियम विरुद्ध प्रभार: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में MBBS डॉक्टरों की जगह RMA को प्रभारी बनाया गया है, जो सीधे तौर पर शासन के नियमों का उल्लंघन है।
अधिवक्ता पटेल का तीखा प्रहार: ‘पहले भी की थी शिकायत, अब नहीं सहेंगे खामोशी‘
अधिवक्ता रामनरेश पटेल, जो रेडक्रास सोसायटी के प्रदेश प्रतिनिधि के रूप में स्वास्थ्य सेवाओं की बारीकियों को समझते हैं, ने बताया कि वे पहले भी इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग के सचिव और उच्चाधिकारियों से कर चुके हैं। लेकिन कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार को संरक्षण मिल रहा है।
“डॉ. खरे का पूरा ध्यान जनसेवा पर नहीं, बल्कि बजट की बंदरबांट पर है। यदि अब भी उन्हें पद से हटाकर जांच नहीं की गई, तो ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ ग्रामीण के बैनर तले उग्र जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।”
— रामनरेश पटेल (अधिवक्ता एवं प्रदेश प्रतिनिधि, रेडक्रास सोसायटी)




