बीजापुर। बस्तर अंचल में आदिवासी अधिकारों को लेकर शनिवार को भैरमगढ़ में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जब सर्व आदिवासी समाज ने कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के नेतृत्व में जन आक्रोश रैली निकालते हुए एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को विस्तृत मांग पत्र सौंपा। रैली में शामिल लोगों ने पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को पूर्ण रूप से लागू करने, कानूनी एवं प्रशासनिक सुधार तेज करने और आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक स्वावलंबन सुनिश्चित करने की जोरदार मांग उठाई।
समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने ज्ञापन में टीएसी की बैठक तत्काल बुलाने, आदिवासी भूमि सुरक्षा कानून को प्रभावी बनाने, ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार देने, डीएमएफ व टीएसपी निधि का सीधा हस्तांतरण करने तथा अबूझमाड़ में बाहरी बसावट पर रोक लगाने जैसी प्रमुख मांगें रखीं। उनका कहना था कि इन सुधारों से आदिवासी समाज की सुरक्षा, सम्मान और बस्तर में स्थायी शांति सुनिश्चित होगी।
सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक संघर्ष को याद दिलाते हुए कहा कि जिस प्रकार बिरसा ने जमीन, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा के लिए ‘उलगुलान’ का बिगुल फूंका था, उसी सोच को आज फिर से मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि “अबुआ दिसुम, अबुआ राज” केवल नारा नहीं, बल्कि आदिवासियों की आत्मनिर्भरता और अधिकार का प्रतीक है। मंडावी ने बताया कि बिरसा के आंदोलन के दबाव में अंग्रेज सरकार को छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 लागू करना पड़ा, जिसने आदिवासी भूमि को बाहरी कब्जों से कानूनी सुरक्षा दी।
सभा में सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने कहा कि बिरसा मुंडा ने सिखाया कि अपनी पहचान, अपनी भूमि और संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित होना जरूरी है। ब्लॉक अध्यक्ष सीताराम मांझी ने कहा कि समाज बिरसा की विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए धरती, संस्कृति और जनअधिकारों की रक्षा का संकल्प लेता है।कार्यक्रम में दशरथ कुंजाम, बलदेव अतरा, रानू सोरी, रतन कश्यप, सत्य प्रेम वेंजम, रामलाल यादव, शिव पुनेम, भावसिंह भास्कर और दसमत पोडियामी सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। रैली के दौरान समाज के वरिष्ठ सदस्य सीएस नेताम, कमलेश पैंकरा, बुधराम गावड़े, सरजू भास्कर, सोहन भोगामी, मुर्रा वेट्टी, जोगा माड़वी, दुल्ला कश्यप, चैतुराम हपका, विशु इच्छम, मनधर नाग, सुनील एर्पुडे, मोटू वेट्टी, श्रवण सैंड्रा समेत बड़ी संख्या में आदिवासीजन उपस्थित रहे।







