महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विधायक संगीता सिन्हा ने पेश किए रोंगटे खड़े करने वाले आंकड़े; पूछा- ‘जब हर जिले में अजाक और सायबर थाने, तो सभी 33 जिलों में महिला थाने क्यों नहीं ?
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर | छत्तीसगढ़ में महिलाओं और मासूम बच्चियों की सुरक्षा के सरकारी दावों की पोल खुद सरकारी आंकड़ों ने ही खोल दी है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व विधायक संगीता सिन्हा ने सरकारी दस्तावेजों के आधार पर ऐसे डरावने आंकड़े पेश किए हैं, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में महिलाओं व बच्चियों के खिलाफ अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। संगीता सिन्हा ने सरकार को सीधे घेरते हुए एक बड़ी मांग उठाई है। उन्होंने कहा, “जब राज्य के हर जिले में अजाक और सायबर थाने खोले जा सकते हैं, तो फिर छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूर्णतः महिला थाने क्यों नहीं हैं? वर्तमान में केवल कुछ ही जिलों में महिला थाने क्यों सिमटे हुए हैं?”
साल-दर-साल कैसे बढ़ा खौफ का ग्राफ?
विधायक संगीता सिन्हा द्वारा प्रस्तुत किए गए राज्य स्तरीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में दुष्कर्म और अपहरण की घटनाएं लगातार बढ़ते क्रम में हैं:
दुष्कर्म (महिला व बच्ची):
वर्ष 2023 में 2,743 मामले दर्ज हुए।
वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 3,096 पहुंच गई।
वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 3,070 रहा।
वर्ष 2026 (केवल 15 जून तक – 5.5 महीने) में ही रिकॉर्ड 1,550 मामले दर्ज हो चुके हैं।
अपहरण (नाबालिग व महिला):
वर्ष 2023 में 2,308 मामले दर्ज हुए।
वर्ष 2024 में यह बढ़कर 2,961 हो गए।
वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 3,040 पहुंच गया।
वर्ष 2026 (केवल 15 जून तक – 5.5 महीने) में रिकॉर्ड 1,746 मामले आ चुके हैं, जो दर्शाते हैं कि यह ग्राफ लगातार बढ़ते क्रम में है।
रायपुर का सच: राजधानी में ही सुरक्षित नहीं हैं मासूम बच्चियां
प्रदेश की सबसे सुरक्षित कही जाने वाली राजधानी रायपुर की स्थिति और भी गंभीर है। आंकड़ों पर नजर डालें तो यहाँ हर साल अपराधों का मीटर तेजी से घूम रहा है।
1. मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत (रायपुर जिला):
अपहरण: वर्ष 2023 में 353 बच्चियों का अपहरण हुआ, जो 2024 में 410 और 2025 में 478 तक पहुंच गया। साल 2026 के शुरुआती साढ़े पांच महीनों में ही 251 मामले आ चुके हैं, जो साल के अंत तक 500 पार जाने का इशारा कर रहे हैं।
दुष्कर्म: वर्ष 2023 में 116, 2024 में 133, 2025 में 137 और 2026 के केवल 5.5 महीनों में ही मासूमों से दरिंदगी के 49 मामले दर्ज हो चुके हैं।
2. महिलाओं के साथ घटित अपराध (रायपुर जिला):
दुष्कर्म: रायपुर में महिलाओं से दुष्कर्म के मामले साल-दर-साल बढ़ रहे हैं। वर्ष 2023 में 107, 2024 में 114, 2025 में 144 मामले आए। वहीं 2026 के शुरुआती 5.5 महीनों में ही 93 मामले दर्ज हो चुके हैं, जो जल्द ही 100 का आंकड़ा पार कर लेंगे।
छेड़खानी: वर्ष 2023 में 105, 2024 में 81, 2025 में 102 और 2026 के केवल 5.5 महीनों में 50 मामले सामने आए हैं।
*न्यायधानी बिलासपुर का हाल: कानून का खौफ खत्म
बिलासपुर जिले में भी अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जो पुलिसिंग पर बड़े सवाल उठा रहे हैं:
अपहरण: वर्ष 2023 में 272, 2024 में 293, 2025 में 317 और 2026 के केवल 5.5 महीनों में 200 मामले आ चुके हैं।
दुष्कर्म: वर्ष 2023 में 113, 2024 में 152, 2025 में 108 और 2026 के 5.5 महीनों में 39 मामले दर्ज हो चुके हैं।
छेड़खानी: वर्ष 2023 में 32, 2024 में 46, 2025 में 42 और 2026 के केवल 5.5 महीनों में 29 मामले दर्ज किए गए।
3 बड़े सवाल (जिसका जवाब सरकार को देना होगा):
सवाल नंबर 1: जब हर जिले में सायबर और अजाक थाने हो सकते हैं, तो आधी आबादी की सुरक्षा के लिए सभी 33 जिलों में महिला थानों की मंजूरी देने में देरी क्यों?
सवाल नंबर 2: थानों में दर्ज मामले केवल वही हैं जो पुलिस तक पहुंचे। सामाजिक लोकलाज के कारण जो मामले दब जाते हैं, उन्हें रोकने के लिए जमीनी स्तर पर पुलिसिंग क्यों फेल है?
सवाल नंबर 3: रायपुर और बिलासपुर जैसे जिलों में यदि हर साल अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है, तो छोटे और सुदूर जिलों में सुरक्षा की क्या स्थिति होगी?
विधायक की सरकार से बड़ी मांगें:
प्रदेश के सभी 33 जिलों में तत्काल पूर्णतः सक्रिय महिला थानों की स्थापना की जाए।
इन थानों में केवल महिला पुलिस अधिकारियों को पदस्थ किया जाए, ताकि पीड़िताएं बिना झिझक अपनी बात कह सकें।
बढ़ते अपराधों को देखते हुए राज्य सरकार अपनी सुरक्षा रणनीति और कार्ययोजना स्पष्ट करे।
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