सूरजपुर से अच्छा संदेश : जब जिले की कप्तान खुद अपनी संतान को लेकर ‘बूथ’ पर आ जाए, तो भला कोई अभिभावक पीछे कैसे रह जाए !
नई पहल न्यूज नेटवर्क। सूरजपुर। इसे कहते हैं ‘लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट’ यानी मोर्चे पर खुद आगे खड़े होना। सूरजपुर की कलेक्टर रेना जमील ने रविवार को जिला चिकित्सालय में कुछ ऐसा ही कर दिखाया, जिसकी चर्चा आज पूरे प्रदेश की जुबां पर है। पल्स पोलियो अभियान-2026 के आगाज के मौके पर कलेक्टर ने किसी औपचारिकता या सरकारी तामझाम का सहारा नहीं लिया, बल्कि वह खुद एक आम मां की तरह अपनी नन्हीं ढाई साल की बेटी को गोद में उठाकर सीधे जिला अस्पताल के बूथ पर पहुंच गईं। अस्पताल में मौजूद लोग उस वक्त हैरान और प्रेरित हो उठे, जब जिले की सबसे बड़ी प्रशासनिक अधिकारी ने बेहद सादगी के साथ अपने हाथों से अपनी लाडली को ‘दो बूंद जिंदगी की’ पिलाई। ममता के इस फर्ज को पूरा करने के तुरंत बाद उन्होंने वहां मौजूद अन्य ग्रामीण व स्थानीय परिवारों के मासूम बच्चों को भी अपनी गोद में उठाया और उन्हें मुस्कुराते हुए पोलियो ड्रॉप पिलाई। कलेक्टर का यह संवेदनशील रूप न सिर्फ सोशल मीडिया पर तारीफें बटोर रहा है, बल्कि इसने पोलियो के खिलाफ जंग में जागरूकता की एक नई मिसाल पेश की है।

पहले मैं एक मां हूँ… और हर बच्चे की सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है
अपनी बेटी और जिले के नौनिहालों को सुरक्षा कवच देने के बाद कलेक्टर रेना जमील ने बेहद प्रभावशाली और दिल को छू लेने वाली बात कही:
एक प्रशासनिक अधिकारी होने से पहले मैं एक मां हूँ। जो चिंता मुझे अपनी बेटी के स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की है, वही चिंता मुझे सूरजपुर के हर एक बच्चे की है। पोलियो की ये दो बूंदें हमारे बच्चों के सुरक्षित बचपन की सबसे बड़ी ढाल हैं। जब मेरी बेटी सुरक्षित है, तो जिले का हर बच्चा सुरक्षित होना चाहिए। मैं सूरजपुर के सभी अभिभावकों से हाथ जोड़कर अपील करती हूँ कि अंधविश्वास या लापरवाही छोड़ें और 0 से 5 वर्ष तक के अपने बच्चों को यह खुराक जरूर दिलाएं।
अब महाअभियान की बारी : 29 और 30 जून को आपके दरवाजे पर दस्तक देगी ‘सुरक्षा कवच’ की टीम
कलेक्टर की इस अनूठी पहल ने जिले के स्वास्थ्य अमले में दोगुना जोश भर दिया है। शत-प्रतिशत बच्चों तक पहुंचने के लिए जिला प्रशासन ने अब कमर कस ली है:
- घर-घर पहुंचेगा प्रशासन: जो बच्चे रविवार को किसी कारणवश अस्पताल या बूथों तक नहीं आ पाए, उनके लिए 29 और 30 जून को विशेष महाअभियान चलाया जा रहा है।
- द्वार पर मुस्तैदी: स्वास्थ्य विभाग की टीमें मुस्तैदी के साथ आपके घर का दरवाजा खटखटाएंगी।
- अंतिम अपील: कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जिले का एक भी बच्चा छूटना नहीं चाहिए। अभिभावकों से अनुरोध है कि वे स्वास्थ्य कर्मियों का स्वागत करें और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करें।
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