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युवक कांग्रेस चुनाव पर भाजयुमो का बड़ा हमला : परिवारवाद का मंडप तैयार, किसी नेतापुत्र का ही दूल्हा बनना तय

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बीच चुनाव में प्रभारी को हटाना कांग्रेस के जर्जर और रीढ़विहीन ढाँचे का सबूत: राहुल टिकरिहा

• गरीब कार्यकर्ताओं के बस की बात नहीं यूथ कांग्रेस का चुनाव, एक-एक वोट के लिए लुटाने पड़ रहे 75 रुपए

• वायरल चैट और फर्जी दस्तावेजों के सहारे मैदान में उतर रहे आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग : भाजयुमो

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ में युवक कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव को लेकर सियासी पारा गरमा गया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और चुनावी प्रक्रिया पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। टिकरिहा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि युवक कांग्रेस के चुनाव का मंडप सज चुका है और इस बार भी किसी रसूखदार ‘नेतापुत्र’ का ही दूल्हा बनना पूरी तरह तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुनाव सामान्य और गरीब कार्यकर्ताओं के लिए नहीं, बल्कि केवल पूंजीपतियों को स्थापित करने का जरिया बनकर रह गया है।

बीच चुनाव में प्रभारी बदलना आपसी कलह का प्रमाण

​भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष ने यूथ कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रभारी अमित पठानिया को ऐन चुनाव के बीच हटाकर डॉ. स्मृति रंजन लेंका को जिम्मेदारी सौंपने पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

​”चुनाव के ठीक मध्य में प्रभारी को बदलना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कांग्रेस के भीतर अविश्वास और अंतर्कलह चरम पर है। अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है और इनका पूरा ढाँचा ताश के पत्तों की तरह ढह रहा है।”

₹75 का खेल: पूंजीपतियों की कठपुतली बना संगठन

​राहुल टिकरिहा ने चुनावी खर्च पर घेरेबंदी करते हुए कहा कि यूथ कांग्रेस में एक मत (वोट) के पंजीयन का खर्च ही 75 रुपये रखा गया है। इस गणित के हिसाब से यदि किसी गरीब या बेरोजगार युवा नेता को मैदान में टिकना है, तो 1,000 वोटों के लिए ही सीधे 75 हजार रुपये फूंकने पड़ेंगे। यह प्रक्रिया जमीनी कार्यकर्ताओं के सामर्थ्य से कोसों दूर है।

संभावित चेहरों पर तंज: मैदान में भाई-भतीजे और दागी

​भाजयुमो अध्यक्ष ने संभावित दावेदारों की सूची पर चुटकी लेते हुए कहा कि दौड़ में शामिल चेहरे ही कांग्रेस के असली ‘परिवारवाद’ का चेहरा उजागर करते हैं। उन्होंने दावा किया कि:

  • ​चुनावी रेस में एक नाम पूर्व उपमुख्यमंत्री का भतीजा है।
  • ​दूसरा नाम एक पूर्व मंत्री का पुत्र है।
  • ​एक अन्य दावेदार, जो पूर्व महापौर का भतीजा है, उसकी पृष्ठभूमि आपराधिक रही है और उसके पिता स्वयं एक बड़े घोटाले में जेल की सलाखों के पीछे हैं।
  • ​उम्र सीमा के बंधन से बचने के लिए कई नेताओं द्वारा फर्जी दस्तावेज तक इस्तेमाल किए जाने की खबरें आ रही हैं।

भाजपा और कांग्रेस की कार्यशैली में जमीन-आसमान का अंतर

​अपनी बात को पुख्ता करते हुए टिकरिहा ने खुद का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में किसी भी सामान्य कार्यकर्ता को उसकी कार्यकुशलता और निष्ठा के आधार पर सम्मानित स्थान मिलता है। यही कारण है कि एक छोटे से गाँव से आने के बावजूद पार्टी ने उन्हें आज भाजयुमो जैसी बड़ी युवा इकाई का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है।

“गुटबाजी से तय होती है परफॉर्मेंस”

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे चैट्स का हवाला देते हुए भाजयुमो अध्यक्ष ने कहा कि यूथ कांग्रेस में खुलेआम पक्षपात और अपनों को रेवड़ियां बांटने का खेल चल रहा है। ‘वन मैन, वन पोस्ट’ के दावे खोखले साबित हो चुके हैं। नियमों में बार-बार हो रहे बदलाव और नामांकन स्थगित होने की नौबत यह बताती है कि यह कोई ‘स्टार परफॉर्मर’ शो नहीं, बल्कि आकाओं की परिक्रमा का नतीजा है।

​उन्होंने अंत में कहा कि जो संगठन खुद का घर नहीं संभाल सकता, वह प्रदेश के युवाओं के भविष्य की बात करने का ढोंग बंद करे। भाजयुमो छत्तीसगढ़ के युवाओं के हक में कांग्रेस के इस पूरे ड्रामे को बेनकाब करती रहेगी।

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