स्वस्थ एवं गरिमापूर्ण वृद्धावस्था के लिए योग थीम पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने लिया निरोगी जीवन का संकल्प, अद्भुत योग कला देख मंत्रमुग्ध हुए लोग
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। स्वस्थ तन, शांत मन और संतुलित जीवन का दिव्य संदेश आज जन-जन तक पहुँच गया। अवसर था दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, मनेंद्रगढ़ में आयोजित 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का, जहाँ योग के प्रति अटूट उत्साह, गरिमा और भव्यता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। वर्ष 2026 की विशेष थीम “स्वस्थ एवं गरिमापूर्ण वृद्धावस्था के लिए योग” को समर्पित इस भव्य समारोह में पूरा विद्यालय परिसर योगिक ऊर्जा और सकारात्मकता से सराबोर हो उठा।
इस गौरवमयी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राम एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमेशचंद्र सिंह शामिल हुए। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में 18वीं बटालियन के कमांडिंग अधिकारी संजय शर्मा, पतंजलि योग समिति के योग परीक्षक सतीश उपाध्याय तथा योग साधक विवेक कुमार तिवारी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इनके साथ ही लायंस क्लब के 10 प्रतिष्ठित सदस्यों ने भी अतिथि के रूप में शिरकत की।

सरस्वती वंदना से शुरुआत और योगासनों का अभ्यास
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इसके बाद अनुभवी योग प्रशिक्षकों के सीधे मार्गदर्शन में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने मिलकर विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया। सामूहिक योगाभ्यास के दौरान सभी ने ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम और प्राणायाम के साथ-साथ गहरे ध्यान का अभ्यास किया। परिसर में मौजूद हर व्यक्ति ने योग से मिलने वाले शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों को साक्षात महसूस किया।
विवेक कुमार तिवारी के योग प्रदर्शन ने बांधा समां
समारोह का मुख्य आकर्षण योग साधक विवेक कुमार तिवारी रहे, जिन्होंने मंच पर अपनी अद्भुत और कठिन योग कला का सजीव प्रदर्शन किया। उनके लचीलेपन और एकाग्रता को देखकर वहाँ मौजूद सभी लोग मंत्रमुग्ध रह गए और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
योग जीवन जीने की उत्कृष्ट पद्धति: प्रबुद्ध जनों के विचार
- संजय शर्मा (कमांडिंग अधिकारी): “योग हमारी भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य और गौरवशाली धरोहर है। यह न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि व्यक्ति को आत्मानुशासन और सकारात्मकता की ओर अग्रसर करता है।”
- सतीश उपाध्याय (योग प्रशिक्षक): “स्वस्थ, समृद्ध और सफल जीवन की असली आधारशिला योग ही है। विद्यार्थियों को इसे अपनी शुरुआती दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।”
- अश्वनी वर्मा (प्राचार्य): “योग को केवल एक शारीरिक व्यायाम समझने की भूल न करें। यह वास्तव में एक संतुलित, अनुशासित और सार्थक जीवन जीने की सबसे उत्कृष्ट पद्धति है।”
- पूनम सिंह (निदेशिका): “किसी भी शैक्षणिक संस्थान का दायित्व सिर्फ किताबी या अकादमिक ज्ञान देना नहीं है। हमारा असली मकसद विद्यार्थियों को स्वस्थ और संतुलित जीवन के संस्कार देना है।”
सामूहिक संकल्प और राष्ट्रगान के साथ समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विद्यालय प्रबंधन की ओर से आए हुए सभी गणमान्य अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके बाद, समारोह में उपस्थित सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। अंत में देश के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए राष्ट्रगान के साथ इस सफल और स्मरणीय आयोजन का समापन हुआ।
यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों में स्वास्थ्य और अनुशासन की भावना जगाने वाला साबित हुआ, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने वाला एक मील का पत्थर बन गया।
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