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चिरमिरी पुलिस को बड़ी सफलता : क्रिप्टो और ट्रेडिंग के नाम पर ‘डबल’ का खेल : 72 लाख की ठगी करने वाला शातिर बिलासपुर से गिरफ्तार

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10% मासिक रिटर्न का लालच देकर बनाई ‘सुखरानी’ कंपनियां, चिरमिरी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2 करोड़ के फर्जीवाड़े का खुलासा

नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी । निवेश को दस महीने में दोगुना करने और हर महीने 10 प्रतिशत भारी-भरकम मुनाफे का सब्जबाग दिखाकर लाखों रुपये डकारने वाले एक बेहद शातिर ठग को चिरमिरी पुलिस ने बिलासपुर से धर दबोचा है। आरोपी विकास घोघाल (27 वर्ष) ने क्रिप्टो करेंसी और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर चिरमिरी के तीन नागरिकों से 72 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। पुलिस की कड़ाई से हुई पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि आरोपी ने अलग-अलग कंपनियों के नाम पर लोगों से करीब 2 करोड़ रुपये समेटे और उन पैसों से अपनी ऐशो-आराम की जिंदगी बसर कर रहा था।

झांसे में आए पीड़ित : शुरुआत में दिया ‘प्रॉफिट’, फिर उड़ाए लाख टके

​मामले का खुलासा तब हुआ जब चिरमिरी निवासी अनवर मोहम्मद ने थाना चिरमिरी में इस जालसाजी की लिखित शिकायत दर्ज कराई। प्रार्थी के मुताबिक, बिलासपुर निवासी विकास घोघाल ने उसे क्रिप्टो करेंसी और ऑनलाइन ट्रेडिंग में पैसे लगाने पर हर महीने 10% लाभ देने का लालच दिया था।

​आरोपी के इस मायाजाल में फंसकर अनवर ने किस्तों में कुल 10 लाख रुपये का निवेश कर दिया। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने कुछ पैसे रिटर्न भी किए, लेकिन जैसे ही प्रार्थी ने 5 लाख रुपये की एक और बड़ी रकम नकद सौंपी, आरोपी ने अपना मोबाइल बंद कर संपर्क तोड़ दिया।

एक नहीं, तीन शिकार : कुल 72 लाख की चपत

​पुलिसिया तफ्तीश में जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो इस जालसाज के कई और शिकार सामने आए। जांच में पता चला कि आरोपी विकास ने केवल अनवर को ही नहीं, बल्कि चिरमिरी के दो अन्य संभ्रांत नागरिकों को भी अपनी ठगी का शिकार बनाया था:

  • तापस बनर्जी: निवेश के नाम पर 28 लाख रुपये की ठगी।
  • जॉय बंधोपाध्याय: मुनाफे के जाल में फंसाकर 30 लाख रुपये की चपत।

​तीनों पीड़ितों को मिलाकर आरोपी ने कुल 72 लाख रुपये की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला था।

‘सुखरानी’ कंपनियों का मकड़जाल, 2 करोड़ का फंड जुटाकर खरीदीं गाड़ियां

​थाना चिरमिरी में आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 175/26, धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जब बैंक खातों के लेन-देन खंगाले गए, तो पुलिस की आंखें फटी की फटी रह गईं।

पर्दाफाश: आरोपी विकास ने वर्ष 2019 में “सुखरानी ट्रेंड ट्रेवल्स” और वर्ष 2024 में “सुखरानी लॉजिस्टिक्स” नाम से फर्जी तौर पर कंपनियां खड़ी की थीं। इन कंपनियों की आड़ में उसने जनता से लगभग 2 करोड़ रुपये की उगाही की। इस रकम का इस्तेमाल उसने अपने निजी शौक पूरे करने और लग्जरी गाड़ियां खरीदने में किया। पुलिस ने आरोपी के पास से एक कार और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

बिलासपुर में दबिश और सलाखों के पीछे मुल्जिम

​पुलिस अधीक्षक के कड़े निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व नगर पुलिस अधीक्षक के कुशल मार्गदर्शन में गठित एक विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों (साइबर सेल) की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। 17 जून 2026 को पुलिस टीम ने बिलासपुर में घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया। कोर्ट में पेशी के बाद 18 जून को आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

​इस बेहद पेचीदा और तकनीकी मामले को सुलझाने और आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने में थाना प्रभारी विजय सिंह, एसआई रुस्तम नर्सिंग खान, पीएसआई जिजासा यादव, अर्चना ठाकुर, आरक्षक चन्द्रसेन राजपूत और सैनिक प्रमोद साह की भूमिका सराहनीय रही। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस सिंडिकेट में कुछ और लोग तो शामिल नहीं हैं।

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