बड़ी खबर : वोटर लिस्ट में ‘सफाई’ नहीं ‘सफाया’ की साजिश : चरणदास महंत ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, भाजपा की ‘फॉर्म-7’ रणनीति पर उठाए सवाल

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नेता प्रतिपक्ष का बड़ा आरोप : हर विधानसभा से 20 हजार मतदाताओं के नाम काटने का लक्ष्य, वर्ग विशेष और समुदायों को बनाया जा रहा निशाना

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भारत निर्वाचन आयोग को एक बेहद गंभीर और कड़ा पत्र लिखकर प्रदेश की मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों पर सवाल उठाए हैं। डॉ. महंत ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की आड़ में लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ‘फॉर्म-7’ के सुनियोजित दुरुपयोग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

“भाजपा कार्यालय से तैयार हो रही नाम काटने की स्क्रिप्ट”

​डॉ. महंत ने अपने पत्र में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने हर विधानसभा क्षेत्र में ऐसे मतदाताओं की पहचान करने की रणनीति बनाई है जो उनके पक्ष में मतदान नहीं करते।

  • टारगेट: प्रत्येक बूथ पर लगभग 200 मतदाताओं के नाम विलोपित (काटने) करवाने का लक्ष्य।
  • रणनीति: भाजपा कार्यकर्ताओं को ब्लेंक ‘फॉर्म-7’ भरकर जमा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रशासन बिना पर्याप्त सत्यापन के नाम काट दे।
  • आंकड़ा: नेता प्रतिपक्ष ने आशंका जताई है कि इस षड्यंत्र के जरिए प्रत्येक विधानसभा से लगभग 20 हजार मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास है।

संविधान के अनुच्छेद 326 पर सीधा प्रहार

​डॉ. महंत ने पत्र में स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया केवल प्रशासनिक नहीं है, बल्कि एक ‘लक्षित’ रणनीति है। उन्होंने कहा कि “वोटर लिस्ट की सफाई” के नाम पर “वोटर लिस्ट का सफाया” किया जा रहा है।

यह संविधान के अनुच्छेद 326 (सार्वभौमिक मताधिकार) और लोकतंत्र की मूल आत्मा पर सीधा हमला है। निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए संस्थागत तटस्थता को ठेस पहुंचाई जा रही है। किसी को भी बिना साक्ष्य के ‘फलां व्यक्ति यहां नहीं रहता’ कहकर सूची से बाहर करना लोकतंत्र के भविष्य के लिए खतरा है।

डॉक्टर चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष

चुनाव आयोग से नेता प्रतिपक्ष की 5 प्रमुख मांगें:

  1. फॉर्म-7 पर रोक: लक्षित तरीके से नाम कटवाने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगे।
  2. पुराने मतदाताओं का संरक्षण: जो लोग 2003 या उससे पहले से मतदान कर रहे हैं, उनके नाम संदेह के आधार पर न हटाए जाएं।
  3. सख्त सत्यापन: आवेदनकर्ता की पहचान, साक्ष्य और उसकी मंशा की अनिवार्य रूप से जांच हो।
  4. भेदभाव का अंत: सुनिश्चित हो कि किसी विशेष समुदाय या धर्म के मतदाताओं के साथ भेदभाव न हो।
  5. स्वतंत्र ऑडिट: नाम हटाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर विधानसभा में निगरानी टीम गठित की जाए।

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