नवा रायपुर में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक, स्वास्थ्य सचिव ने दिए मातृ-शिशु स्वास्थ्य और डेटा रिपोर्टिंग के सख्त निर्देश
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर|छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत बदलने और मातृ-शिशु मृत्यु दर पर प्रभावी लगाम कसने के लिए सरकार ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय मैराथन बैठक में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर जीवन अनमोल है और स्वास्थ्य विभाग का अमला सेवा भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे।

हाई-अलर्ट पर स्वास्थ्य तंत्र: बैठक के मुख्य बिंदु
बैठक की अध्यक्षता कर रहे स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए कई कड़े निर्देश जारी किए:
- समय पर रेफरल ही संजीवनी: स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए ‘हाई रिस्क’ मामलों की पहचान शुरुआती दौर में ही होनी चाहिए। यदि मामला गंभीर है, तो उसे तत्काल उच्च स्तरीय संस्थानों में रेफर करें और मरीज के डिस्चार्ज होने तक फॉलो-अप लें।
- दवा और जांच में आत्मनिर्भरता: अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों को बाहर से दवा खरीदने या जांच कराने के लिए मजबूर न किया जाए। प्रभावी औषधियां और आवश्यक पैथोलॉजी सुविधाएं अस्पताल परिसर के भीतर ही सुनिश्चित की जाएं।
- अनिवार्य रिपोर्टिंग और डेटा ऑडिट: सचिव श्री कटारिया ने निर्देश दिए कि मातृ-शिशु मृत्यु के हर एक मामले का पंजीकरण और रिपोर्टिंग अनिवार्य है। इन मामलों का डेटा विश्लेषण किया जाएगा ताकि भविष्य में वैसी गलतियों की पुनरावृत्ति न हो।
- मौसमी बीमारियों पर ‘अग्रिम प्रहार’: गर्मी और मानसून के मद्देनजर मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए अग्रिम तैयारी पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सुशासन की कसौटी: जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरना प्राथमिकता
बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कार्यक्रमों, टीकाकरण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, और कुष्ठ-टीबी उन्मूलन जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों की भी गहन समीक्षा की गई।
प्रदेश को टीबी और मलेरिया मुक्त बनाना केवल एक विभागीय लक्ष्य नहीं, बल्कि हमारा संकल्प है। जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।
— अमित कटारिया, सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
बैठक में मौजूद प्रमुख चेहरे
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के संचालक संजीव कुमार झा, NHM मिशन संचालक रणबीर शर्मा, महामारी नियंत्रण संचालक डॉ. एस.के. पामभोई सहित सभी संभागों के संयुक्त संचालक और सीएमएचओ (CMHO) उपस्थित रहे। यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अब केवल कागजी आंकड़ों पर नहीं, बल्कि धरातल पर ‘क्वालिटी हेल्थकेयर’ और ‘सेंसिटिव केयर’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आगामी दिनों में जिला स्तर पर इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।







