बायोग्राफी : भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की खाली हुई सीट पर जन सुराज संस्थापक ने लहराया परचम : जानिए चुनावी चाणक्य से सीधे नेता बने प्रशांत किशोर की पूरी कहानी

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नई पहल न्यूज नेटवर्क। पटना। बिहार की राजनीति में एक नया इतिहास रचते हुए जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (प्रशांत किशोर पांडेय) ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज कर ली है। भारतीय जनता पार्टी का मजबूत किला मानी जाने वाली इस सीट पर प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार को भारी मतों के अंतर से शिकस्त देकर सभी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई थी, जिसे भाजपा का अभेद्य गढ़ माना जाता था। पर्चा दाखिल करने से लेकर मतगणना के हर दौर तक प्रशांत किशोर ने लगातार बढ़त बनाए रखी और अंततः एक एकतरफा मुकाबले में जीत हासिल की।

‘किंगमेकर’ से ‘किंग’ बनने का सफर: जानिए कौन हैं प्रशांत किशोर

राजनीतिक रणनीतिकार (पॉलिटिकल स्ट्रैटजिस्ट) के रूप में देश-दुनिया में अपनी धाक जमाने वाले प्रशांत किशोर का पूरा नाम प्रशांत किशोर पांडेय है।

रणनीति छोड़ सीधे जमीन पर उतरे: ‘जन सुराज’ की नीव

​अन्य पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने के बाद प्रशांत किशोर ने खुद सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया। 2022 में उन्होंने गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर बिहार में ‘जन सुराज’ अभियान की शुरुआत की और पूरे बिहार में हजारों किलोमीटर की पदयात्रा की।

​पदयात्रा के दौरान उन्होंने बिहार की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पलायन जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। अक्टूबर 2024 में जन सुराज को औपचारिक रूप से एक राजनीतिक दल का रूप दिया गया।

बांकीपुर की जीत के सियासी मायने

​बांकीपुर में प्रशांत किशोर की यह जीत बिहार की पारंपरिक जातिगत राजनीति के खिलाफ एक नए विकल्प की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ में सेंध लगाकर प्रशांत किशोर ने यह साबित कर दिया है कि जन सुराज केवल एक चुनावी प्रयोग नहीं, बल्कि बिहार की भावी राजनीति में एक मुख्य धुरी बनने के लिए तैयार है।

प्रशांत किशोर: निजी जीवन, परिवार और पूर्ण जीवनी

बिहार की राजनीति में भूचाल लाने वाले और ‘जन सुराज’ के सूत्रधार प्रशांत किशोर पांडेय का जीवन एक वैश्विक पेशेवर, चुनावी रणनीतिकार और अब एक सीधे जनप्रतिनिधि के रूप में बेहद दिलचस्प रहा है।

​1. पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं निजी जीवन

​प्रशांत किशोर का जन्म बिहार के बक्सर जिले के अहिरौली गाँव में हुआ था, लेकिन उनका पालन-पोषण मुख्य रूप से सासाराम (रोहतास) और बक्सर के आसपास हुआ।

  • ​पिता: डॉ. श्रीकांत पांडेय (पेशे से एक सरकारी चिकित्सक रहे हैं)।
  • ​माता: इंदिरा पांडेय (गृहणी)।
  • ​पत्नी: डॉ. जान्हवी दास (Jahnvi Das) प्रशांत किशोर की पत्नी जान्हवी दास असम की रहने वाली हैं और पेशे से एक डॉक्टर (चिकित्सक) हैं। दोनों की मुलाकात उस समय हुई थी जब प्रशांत किशोर संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के सिलसिले में पूर्वोत्तर भारत और अन्य राज्यों में कार्यरत थे। जान्हवी दास सार्वजनिक चकाचौंध और मीडिया से काफी दूर रहती हैं और मुख्य रूप से अपने डॉक्टरी पेशे तथा परिवार पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
  • ​बच्चे: प्रशांत किशोर और डॉ. जान्हवी दास का एक बेटा है, जो फिलहाल अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा है। प्रशांत किशोर अपने परिवार के निजी जीवन को मीडिया और राजनीतिक सुर्खियों से पूरी तरह अलग रखते हैं।

​2. शिक्षा और संयुक्त राष्ट्र (UN) में करियर

  • ​प्रारंभिक शिक्षा: प्रशांत किशोर की शुरुआती स्कूली पढ़ाई बिहार में हुई। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग/सॉफ्टवेयर और पब्लिक हेल्थ से जुड़ी पढ़ाई की।
  • ​संयुक्त राष्ट्र (UN) में कार्य: राजनीतिक क्षेत्र में आने से पहले वे एक सफल अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट/सरकारी सलाहकार थे। उन्होंने लगभग 8-10 वर्षों तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ जनस्वास्थ्य (Public Health) विशेषज्ञ के रूप में काम किया। इस दौरान वे अफ्रीका (विशेषकर चाड) और भारत के कई पिछड़े इलाकों में कुपोषण और स्वास्थ्य योजनाओं पर काम कर चुके हैं।

​3. ‘किंगमेकर’ और चुनावी रणनीतिकार का दौर (2011 – 2021)

​2011 में अंतरराष्ट्रीय नौकरी छोड़कर प्रशांत किशोर भारत लौटे और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम से जुड़े।

  • ​CAG और I-PAC का गठन: उन्होंने ‘सिटिजन्स फॉर एकाउंटेबल गवर्नेंस’ (CAG) और बाद में ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (I-PAC) जैसी संस्थाओं की नींव रखी, जिसने भारत में राजनीति को डेटा, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और मीडिया कैंपेन के जरिए लड़ने का नया तरीका सिखाया।
  • ​प्रमुख चुनावी सफलताएं:
    • ​2014: नरेंद्र मोदी का ‘चाय पर चर्चा’, ‘3D रैलियां’ और ‘अच्छे दिन’ का नारा।
    • ​2015 (बिहार): नीतीश कुमार और लालू यादव के ‘महागठबंधन’ की जीत।
    • ​2017 (पंजाब): कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी (‘कॉफी विद कैप्टन’)।
    • ​2019 (आंध्र प्रदेश): वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी की ऐतिहासिक जीत।
    • ​2021 (पश्चिम बंगाल): तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी) की भाजपा के खिलाफ भारी जीत।
    • ​2021 (तमिलनाडु): एम.के. स्टालिन (DMK) की जीत।

​पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में जीत के बाद मई 2021 में उन्होंने औपचारिक रूप से चुनावी रणनीतिकार (Political Strategist) का काम छोड़ने की घोषणा कर दी।

​4. सक्रिय राजनीति और ‘जन सुराज’ का उदय

​चुनावी प्रबंधन छोड़ने के बाद प्रशांत किशोर ने सीधे जनता के बीच जाने का फैसला किया।

  • ​जदयू (JDU) में संक्षिप्त पारी: 2018 में वे नीतीश कुमार की पार्टी JDU में शामिल हुए और उपाध्यक्ष बनाए गए थे, लेकिन सीएए-एनआरसी (CAA-NRC) के मुद्दे पर मतभेद के चलते 2020 में उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया।
  • ​पदयात्रा और जन सुराज: 2 अक्टूबर 2022 (गांधी जयंती) को उन्होंने पश्चिम चंपारण के भीतिहरवा गांधी आश्रम से ‘जन सुराज’ पदयात्रा शुरू की। उन्होंने बिना किसी वाहन के बिहार के गाँव-गाँव जाकर 3,000 किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा की।
  • ​राजनीतिक दल की स्थापना: अक्टूबर 2024 में ‘जन सुराज’ को आधिकारिक तौर पर राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराया गया, जिसका मुख्य एजेंडा बिहार से बेरोजगारी, पलायन और शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना है।

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