बस्तर बनेगा ग्लोबल हब : विकास योजना के तहत पर्यटन, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹15,000 करोड़ से अधिक का फोकस
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नई दिल्ली / रायपुर |छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर ‘बस्तर 2.0’ का विजन डॉक्यूमेंट पेश किया। यह केवल एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि बस्तर के उन लाखों आदिवासियों के सपनों का रोडमैप है, जिन्होंने दशकों तक बंदूकों के साये में जीवन बिताया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब बस्तर में गोलियों की तड़तड़ाहट शांत हो चुकी है और वहां शांति का सूर्योदय हो चुका है।

सैचुरेशन से एम्पावरमेंट’ तक: विकास के 5 स्तंभ
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि बस्तर का कायाकल्प ‘SCFE’ (Saturation, Connect, Facilitate, Empower & Engage) रणनीति पर आधारित होगा। इस ब्लूप्रिंट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- कनेक्टिविटी का महाजाल: 2027 तक हर सुदूर गांव को पक्की सड़क से जोड़ने का लक्ष्य। इसमें 228 नई सड़कें और 267 पुलों का निर्माण शामिल है।
- आर्थिक क्रांति: 2029 तक बस्तर के 85% परिवारों की आय 15,000 से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य।
- शिक्षा और स्वास्थ्य का कवच: 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदलना और जगदलपुर-दंतेवाड़ा में सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार।
बस्तर मुन्ने (अग्रणी बस्तर): चौपाल पर ही होगा समाधान
विकास को फाइलों से निकालकर सीधे जनता तक पहुँचाने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम की घोषणा की है। इसके तहत अब अधिकारियों की पूरी टीम सीधे ग्राम पंचायतों में शिविर लगाएगी। राशन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य सरकारी लाभों के लिए ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि सरकार खुद उनके द्वार पर समाधान करेगी।
पर्यटन की वैश्विक पहचान: ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक
बस्तर को भारत का ‘पर्यटन हब’ बनाने की तैयारी है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पर्यटकों को लुभाने के लिए ग्लास ब्रिज और एडवेंचर कैनोपी वॉक जैसे प्रोजेक्ट्स बस्तर को दुनिया के नक्शे पर लाएंगे।



पीएम मोदी को आमंत्रण: मानसून के बाद बस्तर में होगा शिलान्यास का महाकुंभ
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का न्योता दिया है। पीएम के इस संभावित दौरे में कई गेम-चेंजर प्रोजेक्ट्स की सौगात मिलेगी:
- रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन: बस्तर की जीवनरेखा।
- जगदलपुर एयरपोर्ट विस्तार: बस्तर को देश के बड़े महानगरों से सीधे जोड़ेगा।
- इंद्रावती रिवर प्रोजेक्ट: देउरगांव और मटनार बैराज से 31,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर सिंचाई।
बस्तर 2.0: प्रगति के प्रमुख आंकड़े और भविष्य के लक्ष्य
1. आर्थिक सशक्तिकरण (Income Growth)
- लक्ष्य 2029: 85% परिवारों की मासिक आय में 100% की वृद्धि।
- आय वृद्धि: 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का लक्ष्य।
2. इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी (Connectivity)
- सड़क निर्माण: 228 नई सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित।
- समय सीमा: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्य 2027 तक पूर्ण होंगे।
- बड़ी परियोजनाएं: रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन और जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार।
3. शिक्षा और युवा शक्ति (Education & Youth)
- स्कूलों का कायाकल्प: 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी पक्के भवनों में बदला जाएगा।
- खेल सुविधाएं: 15 नए स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण।
- एजुकेशन सिटी: जगरगुंडा और ओरछा में अत्याधुनिक एजुकेशन सिटी की स्थापना।
4. स्टार्टअप और रोजगार (Startup & Employment)
- विजन 2030: बस्तर और छत्तीसगढ़ में 5,000 नए स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य।
- कौशल विकास: 1 लाख युवाओं को ट्रेनिंग, जिसमें से 40,000 को रोजगार मिल चुका है।
5. सिंचाई और कृषि (Irrigation)
- प्रमुख प्रोजेक्ट: इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार परियोजनाएं।
- लाभ: 31,840 हेक्टेयर भूमि को मिलेगी नई सिंचाई सुविधा।
6. योजना विस्तार (Scheme Expansion)
- नियद नेल्ला नार 2.0: अब 10 जिलों में विस्तार।
- नए शामिल जिले: गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई।
प्रधानमंत्री जी का विजन और हमारा संकल्प अब धरातल पर है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान डर से नहीं, बल्कि ‘नियद नेल्ला नार’ (आपका अच्छा गांव) और स्टार्टअप्स से होगी।
— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़




