The specified slider id does not exist.

मौत की ‘उड़ान’ : संजय गांधी से लेकर अजीत पवार तक : आखिर क्यों हमारे दिग्गजों के लिए ‘काल’ साबित हो रहा है आसमान ?

Share this post:

आसमानी आफत ने फिर छीना देश का दिग्गज : अजीत पवार का विमान हादसे में निधन, ‘हवाई त्रासदी’ के खौफनाक इतिहास ने फिर दोहराया खुद को

नई पहल न्यूज डेस्क। नई दिल्ली/मुंबई/पुणे। महाराष्ट्र की राजनीति का वो सूरज आज अस्त हो गया, जिसकी चमक से सूबे की सत्ता का समीकरण तय होता था। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विमान हादसे में निधन ने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। बुधवार सुबह पुणे की सरहद पर हुए इस खौफनाक क्रैश ने न केवल एक पावरफुल लीडर को छीना, बल्कि भारतीय इतिहास के उस ‘हवाई अभिशाप’ को फिर से जिंदा कर दिया है, जिसने पहले भी कई बार देश के भविष्य को मलबे में तब्दील कर दिया।

अजीत पवार: ‘पावर हाउस’ का खामोश होना

​प्रशासनिक कड़ाई और अपने दो टूक फैसलों के लिए मशहूर अजीत पवार का जाना महाराष्ट्र के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसे दशकों तक नहीं भरा जा सकेगा। यह महज एक नेता का अंत नहीं, बल्कि उस अनुभव और विजन का अंत है जिसने आधुनिक महाराष्ट्र की नींव को मजबूती दी।

खूनी आसमानी इतिहास: जब क्रैश ने बदली देश की तकदीर

​भारतीय राजनीति का आसमान उन सितारों के खून से रंगा है, जिन्होंने बादलों के बीच अपनी जान गंवाई। अजीत पवार इस फेहरिस्त में शामिल होने वाला सबसे ताजा और दुखद नाम हैं।

वे सेनापति और नायक जिन्होंने देश को झकझोरा

  • सीडीएस जनरल बिपिन रावत (2021): तमिलनाडु की पहाड़ियों में हुआ वो क्रैश देश कभी नहीं भूलेगा, जिसमें हमने अपना पहला ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ खो दिया।
  • डॉ. होमी जहांगीर भाभा (1966): भारत के परमाणु कार्यक्रम का ‘दिमाग’ माउंट ब्लांक की पहाड़ियों में खो गया। आज भी उनकी मौत एक अनसुलझी पहेली है।

राजनीति के वे स्तंभ जो बादलों में विलीन हुए

  • संजय गांधी (1980): इंदिरा गांधी के छोटे बेटे और देश के संभावित भविष्य की मौत ने दिल्ली के आसमान में एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ला दिया था।
  • माधवराव सिंधिया (2001): ग्वालियर के महाराज और कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक, जिनका सफर मैनपुरी के पास खत्म हो गया।
  • वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (2009): आंध्र प्रदेश के ‘मसीहा’ कहे जाने वाले वाईएसआर का हेलिकॉप्टर घने जंगलों में मलबे में मिला।
  • दोरजी खांडू (2011): अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री, जिनका हेलिकॉप्टर हिमालय की दुर्गम चोटियों में लापता हो गया था।
  • सुभाष चंद्र बोस (1945): नेताजी की मृत्यु का रहस्य भी ताइवान के विमान हादसे से ही जुड़ा माना जाता है।

: विजय रुपाणी (2025)

​अभी साल भर भी नहीं बीता था कि गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की विमान हादसे में मौत ने सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए थे।

बड़ा सवाल: वीवीआईपी सुरक्षा या तकनीकी नाकामी ?

​अजीत पवार के इस हादसे ने एक बार फिर रोंगटे खड़े कर देने वाला सवाल पूछा है— “क्या हमारा शीर्ष नेतृत्व सुरक्षित है?” आखिर क्यों अत्याधुनिक तकनीक के दौर में भी हमारे दिग्गज नेता इन खौफनाक हादसों का शिकार हो रहे हैं?

About The Author

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

खबरें और भी हैं...

Advertisement Box

RO No. 13820/1

लाइव क्रिकट स्कोर

Gold and Silver price

मौसम अपडेट

राशिफल

© 2026 Nayi Pahal News  – All rights reserved. | News Website Development Services | New Traffic tail