“नारों से नहीं, हर बेटी की सुरक्षा और न्याय से तय होगी सरकार की जवाबदेही” – संगीता सिन्हा
रायपुर, भिलाई के बाद कोरबा की खौफनाक घटना ने खड़े किए कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ की आबोहवा एक बार फिर मासूम बच्चियों की चीखों और सिसकियों से थर्रा उठी है। प्रदेश में बीते 10 से 15 दिनों के भीतर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटनाओं का जो सिलसिला चला है, उसने समूचे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। राजधानी रायपुर से लेकर भिलाई और अब कोरबा तक—महज 3 से 7 साल की मासूम बच्चियों को दरिंदगी का शिकार बनाए जाने की इन वीभत्स वारदातों ने सरकार के तमाम सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। इस सनसनीखेज माहौल के बीच महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने तीखा हमला बोलते हुए सरकार से कड़े जवाब की मांग की है।
खौफ के साये में बचपन: सुरक्षा के दावों पर उठे गंभीर सवाल
प्रदेश में लगातार सामने आ रही वारदातों ने यह साबित कर दिया है कि आज छत्तीसगढ़ में न तो दूधमुंही बच्चियां सुरक्षित हैं और न ही महिलाएं। कोरबा में सात वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका ने तो इस खौफ को चरम पर पहुँचा दिया है। महिला कांग्रेस ने इसे व्यवस्था की नाकामी करार देते हुए कहा है कि जिस राज्य में 3 से 6 साल की मासूमों को भी सुरक्षा न मिल सके, वहाँ ‘महिला सुरक्षा’ के बड़े-बड़े दावे केवल कागजी और खोखले साबित होते हैं।

महिला कांग्रेस की प्रमुख माँगें:
- कठोरतम कार्रवाई: सभी मामलों की निष्पक्ष, त्वरित और उच्चस्तरीय जाँच कर दोषियों को स्पीडी ट्रायल के जरिए फांसी के फंदे तक पहुँचाया जाए।
- कोरबा प्रकरण का सच: कोरबा की घटना से जुड़े तमाम तथ्यों, दुष्कर्म और मौत के कारणों की तत्काल आधिकारिक पुष्टि कर आरोपियों को बेनकाब किया जाए।
- पीड़ित परिवारों को न्याय व सुरक्षा: प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता, मुकम्मल सुरक्षा और हरसंभव न्याय सुनिश्चित किया जाए।
- सख्त जवाबदेही: प्रदेशभर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर लगाम कसने के लिए एक फूल-प्रूफ और जवाबदेह सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए।
“अब नारों से काम नहीं चलेगा”
विधायक संगीता सिन्हा ने दो टूक शब्दों में कहा है कि आज छत्तीसगढ़ की माताएँ और बेटियाँ सिर्फ कोरे नारे और सियासी आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस सुरक्षा चाहती हैं। किसी भी सभ्य समाज में ऐसी अमानवीय घटनाएँ कतई स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। जनता का सीधा और तीखा सवाल अब सरकार की चौखट पर है—जब मासूम बच्चियाँ ही सुरक्षित नहीं हैं, तो महिला सुरक्षा के दावे किस बुनियाद पर किए जा रहे हैं? अब केवल ‘बेटी बचाओ’ का ढिंढोरा पीटने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर बेटी की हिफाजत और दोषियों को सजा दिलाने वाली निर्णायक कार्रवाई करनी ही होगी।
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