बिलासपुर रेल मंडल के GM और DRM को लिखा पत्र; हसदेव व शिवनाथ एक्सप्रेस समेत मेमू ट्रेनों के बेवजह घंटों रोके जाने पर जताई गहरी नाराजगी, समयबद्धता और डेटा सार्वजनिक करने की मांग
नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरबा/बिलासपुर। कोरबा-चांपा-बिलासपुर रेलमार्ग पर लगातार यात्री ट्रेनों के लेट-लतीफ चलने और बिना किसी वजह घंटों आउटर पर खड़े रखे जाने से आम जनता का धैर्य अब जवाब देने लगा है। कर्मचारियों, विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए कोरबा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। सांसद ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के महाप्रबंधक (GM) और मंडल रेल प्रबंधक (DRM) बिलासपुर को कड़ा पत्र भेजकर ट्रेनों की लेटलतीफी पर तत्काल लगाम लगाने के निर्देश दिए हैं।

सांसद महंत ने विशेष रूप से कोरबा–रायपुर और रायपुर–कोरबा रूट पर चलने वाली हसदेव एक्सप्रेस, शिवनाथ एक्सप्रेस और मेमू ट्रेनों की बदहाल समयसारिणी पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोरबा-चांपा–बिलासपुर रेलखंड में यात्री ट्रेनों को बेवजह रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता देना आम यात्रियों के अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है।
सांसद ज्योत्सना महंत की रेलवे से 5 प्रमुख व कड़े सवाल:
- वास्तविक कारणों की हो निष्पक्ष जांच: ट्रेनों के रोजाना घंटों लेट होने की असली वजहों का पता लगाया जाए और जवाबदेही तय हो।
- अननावश्यक स्टॉपेज पर तुरंत लगे रोक: चांपा-बिलासपुर आउटर या छोटे स्टेशनों पर यात्री गाड़ियों को बेफिजूल खड़ा रखना बंद किया जाए।
- समयबद्धता की गारंटी: कोरबा–रायपुर मार्ग की सभी पैसेंजर व एक्सप्रेस ट्रेनों को तय समय पर संचालित करने के लिए ठोस प्लान बने।
- विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन: चांपा–बिलासपुर सेक्शन पर ट्रेनों की आवाजाही की 24/7 विशेष निगरानी की जाए।
- पारदर्शिता और डेटा हो सार्वजनिक: रेलवे रोजाना ट्रेनों के देरी से चलने के वास्तविक कारण और लेट-लतीफी का पूरा रिकॉर्ड आम जनता के सामने उजागर करे।
“यात्रियों के समय की कीमत समझे रेलवे, यह कोरबा की लाइफलाइन है”
सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने रेलवे अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में याद दिलाया कि कोरबा जैसे औद्योगिक और ऊर्जाधानी क्षेत्र के लिए रेल सेवा कोई सुविधा मात्र नहीं, बल्कि जीवनरेखा है। रोजाना हजारों की संख्या में नौकरीपेशा लोग, इलाज कराने वाले मरीज, कॉलेज जाने वाले छात्र और छोटे-बड़े व्यापारी इस मार्ग पर सफर करते हैं।
उन्होंने कहा, “रेलवे को आम नागरिकों के समय और मजबूरी की कीमत समझनी होगी। ट्रेनों के इस तरह अनिश्चितकाल तक लेट होने से लोगों का रोजगार, पढ़ाई और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। यदि रेलवे प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली में जल्द सुधार नहीं किया, तो जनहित में उग्र कदम उठाने से पीछे नहीं हटा जाएगा।”
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