IAS नम्रता जैन की अनोखी पहल : कलेक्टोरेट के द्वार पर लिखा ‘शिक्षा का मंत्र’, बुके की जगह अब बच्चों के हाथों में होगी कॉपी-किताब
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नारायणपुर। जब नियत साफ हो और इरादे नेक, तो प्रशासनिक कुर्सी सिर्फ सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि समाज सुधार का मंच बन जाती है। नारायणपुर की चर्चित और संवेदनशील कलेक्टर आईएएस नम्रता जैन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे ‘बस्तर की पहली आईएएस’ होने का गौरव क्यों रखती हैं। कलेक्टोरेट के मुख्य द्वार पर टंगे एक छोटे से संदेश ने आज पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

“गुलदस्ता मुर्झा जाएगा, ज्ञान का दीप जलेगा”
अक्सर देखा जाता है कि अधिकारी से मिलने वाले लोग महंगे फूलों के गुलदस्ते लेकर पहुंचते हैं, जो कुछ घंटों में मुरझा जाते हैं। कलेक्टर नम्रता जैन ने इस परंपरा को बदलते हुए अपने केबिन के बाहर एक हृदयस्पर्शी संदेश लिखवाया है:
कलेक्टर महोदया से भेंट हेतु बुके (गुलदस्ता) के स्थान पर बच्चों के लिए उपयोगी सामग्री (पेन, कॉपी) ला सकते हैं।
यह सिर्फ एक सूचना नहीं, बल्कि एक आईएएस अधिकारी की अपने क्षेत्र के नौनिहालों के प्रति गहरी संवेदनशीलता है। कलेक्टोरेट पहुंचने वाले लोग अब फूलों की जगह बस्तों में उम्मीदें लेकर आ रहे हैं।
फाइलों में नहीं, पगडंडियों पर दौड़ता प्रशासन
नम्रता जैन की पहचान केवल दफ्तर तक सीमित नहीं है। वे उन चंद अधिकारियों में शुमार हैं जो जमीनी हकीकत जानने के लिए एसी कमरों का आराम छोड़ देती हैं:
- बुलेट वाली कलेक्टर: बस्तर की भौगोलिक चुनौतियों को भांपते हुए वे अक्सर बाइक (बुलेट) से सुदूर वनांचल के उन गांवों तक पहुंच जाती हैं जहां चार पहिया वाहन पहुंचना भी मुश्किल होता है।
- चौपाल पर न्याय: वे ग्रामीणों के बीच बैठकर, उनकी ही भाषा में संवाद कर प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर रही हैं।
- सीधी मॉनिटरिंग: सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं, इसे वे खुद मौके पर जाकर सुनिश्चित करती हैं।
क्यों है यह खबर ‘दमदार’?
अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण जिले में एक महिला अधिकारी का यह सादगी भरा अंदाज न केवल नक्सलियों के गढ़ में उम्मीद की किरण जगा रहा है, बल्कि नए भारत की प्रशासनिक कार्यशैली की एक उम्दा तस्वीर भी पेश कर रहा है। नम्रता जैन की यह सोच बताती है कि विकास केवल सड़कों और इमारतों से नहीं, बल्कि एक बच्चे के हाथ में दी गई उस कलम से शुरू होता है जिसे गुलदस्ते के विकल्प के रूप में चुना गया है।
एक अधिकारी जब अपनी माटी के प्रति इतना समर्पित हो, तो बदलाव का आना निश्चित है।
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