नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर / पंडरिया। विधानसभा मानसून सत्र के पहले ही दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा जनहित और अपने विधानसभा क्षेत्र के वनांचल की समस्याओं को लेकर बेहद सक्रिय नजर आईं। उन्होंने वनांचल क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति, राजस्व मामलों के निपटारे, स्वतः नामांतरण की तकनीकी स्थिति और वनोपज संग्राहकों के कल्याण को लेकर सदन में प्रश्न किए। शासन की ओर से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने इन विषयों पर विस्तृत और वस्तुनिष्ठ जानकारी पटल पर रखी, जो क्षेत्र के विकास के प्रति सरकार की सजगता को दर्शाती है।
1. वनांचल में विद्युत व्यवस्था: 20 में से 12 गांवों में सौर ऊर्जा से पहुंच रही रोशनी
विधायक भावना बोहरा ने वनांचल और आदिवासी बहुल ग्राम पंचायतों (तेलियापानी, बिरहुलडीह, कांदावाणी आदि) के 20 गांवों में बिजली की वर्तमान स्थिति पर जानकारी चाही।
- विधायक का प्रश्न: इन दुर्गम क्षेत्रों में कितने परिवार वर्तमान में नियमित बिजली व्यवस्था से वंचित हैं और उनके लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है?
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का उत्तर:
- प्रश्नाधीन 20 गांवों में से 12 गांवों में सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था सुचारू रूप से काम कर रही है, जिससे ग्रामीणों को रात्रिकालीन प्रकाश और मोबाइल चार्जिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं।
- वर्तमान में 08 गांव पारंपरिक ग्रिड से अविद्युतीकृत हैं, जिनमें 71 परिवार पूर्णतः वंचित हैं और 1,127 परिवार सौर ऊर्जा पर निर्भर हैं।
- सघन वन क्षेत्र (Dense Forest) होने के कारण ये 8 गांव अभी पारंपरिक लाइन विस्तार की योजना में शामिल नहीं हैं, लेकिन क्रेडा (CREDA) और संबंधित स्थापना इकाइयों द्वारा 5 वर्ष की वारंटी के तहत इन सौर संयंत्रों का रखरखाव मुस्तैदी से किया जा रहा है।
2. डिजिटल राजस्व प्रणाली: स्वतः नामांतरण को और बेहतर बनाने की कवायद
रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण (Auto Mutation) की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने को लेकर विधायक ने तकनीकी पहलुओं पर सवाल किया।
- विधायक का प्रश्न: क्या पटवारी और तहसीलदार को भुइयाँ पोर्टल पर स्वतः नामांतरण के सभी मामले दिख रहे हैं? यदि कोई तकनीकी दिक्कत है, तो उसके सुधार की क्या प्रक्रिया है?
- राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा का उत्तर:
- वर्तमान में स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक चल रही है। इसे और बेहतर बनाने के लिए पटवारी और तहसीलदार की भुइयाँ आईडी में सभी प्रकरणों को प्रदर्शित करने हेतु तकनीकी प्रावधान करने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
- 1 मार्च 2024 से 31 मार्च 2026 के बीच पूरे प्रदेश में केवल 09 शिकायतें (दुर्ग में 7, महासमुंद में 2) प्राप्त हुईं, जिनका समय रहते पूरी तरह निराकरण कर लिया गया है।
- यदि कोई त्रुटि होती है, तो ‘छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959’ के नियमों के तहत सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा निर्धारित समय-सीमा में सुधार कार्य किया जाता है।
3. कबीरधाम में राजस्व सुधार: 372 लंबित मामलों का 45 दिनों में होगा निपटारा
क्षेत्र में भू-राजस्व संहिता की धारा 115 (त्रुटि सुधार) के मामलों को गति देने के लिए विधायक ने कबीरधाम जिले की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
- विधायक का प्रश्न: जिले में त्रुटि सुधार के कितने मामले लंबित हैं और इनके त्वरित निराकरण के लिए विभाग क्या कदम उठा रहा है?
- राजस्व मंत्री का उत्तर:
- कबीरधाम जिले में वर्तमान में धारा 115 के तहत कुल 372 प्रकरण (मूल एवं अपील) लंबित हैं, जिनका मुख्य कारण पक्षकारों की अनुपस्थिति या साक्ष्य प्रस्तुत करने में देरी है।
- सरकार इन मामलों को लेकर गंभीर है और इनके निराकरण के लिए 45 कार्य दिवस की समय-सीमा तय की गई है।
- राजस्व शिविरों और ई-कोर्ट के माध्यम से मामलों को तेजी से निपटाया जा रहा है। साथ ही समय पर नोटिस तामिली के लिए माल जमादार और ग्राम कोटवारों को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
4. सामाजिक सुरक्षा: तेन्दूपत्ता संग्राहकों को पारिश्रमिक के साथ मिल रहा योजनाओं का लाभ
वनांचल के परिवारों की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले तेन्दूपत्ता और लघु वनोपज संग्राहकों के कल्याण पर भी विधायक ने ध्यान केंद्रित किया।
- विधायक का प्रश्न: वन सुरक्षा समितियों और श्रमिकों को पारिश्रमिक के अतिरिक्त शासन की ओर से कौन-कौन सी कल्याणकारी सुविधाएं दी जा रही हैं?
- वन मंत्री केदार कश्यप का उत्तर:
- सरकार लघु वनोपज एवं तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य में लगे श्रमिकों और समिति सदस्यों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
- उन्हें तय पारिश्रमिक के अलावा प्रोत्साहन राशि, सामाजिक सुरक्षा, विभिन्न बीमा योजनाएं और उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं निरंतर प्रदान की जा रही हैं।
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