भरतपुर-सोनहत की पूर्व विधायक व पूर्व संसदीय सचिव के जन्मदिन पर वनांचल से लेकर शहरों तक उमड़ा जनसैलाब, कार्यकर्ताओं ने सेवा कार्यों से मना रह अपनी ‘दीदी’ का जन्मदिन
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़ । छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों से लेकर सत्ता के गलियारों तक अपनी सादगी और प्रखर नेतृत्व की अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी की कद्दावर नेत्री, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की ऊर्जावान जिलाध्यक्ष, भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र की पूर्व लोकप्रिय विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव छत्तीसगढ़ शासन, श्रीमती चंपादेवी पावले आज अपना 45वां जन्मदिवस मना रही हैं। 15 जून 1981 को जन्मीं चंपादेवी पावले का राजनीतिक और सामाजिक जीवन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि इरादे फौलादी और जनता के प्रति समर्पण सच्चा हो, तो ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर भी नेतृत्व के शीर्ष शिखर को छुआ जा सकता है। आज उनके जन्मदिवस पर पूरे मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले सहित प्रदेश भर से उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।


माटी से जुड़ाव: जिला पंचायत अध्यक्ष से शुरू हुआ जनसेवा का संकल्प
कोरिया (छ.ग.) की पावन धरा पर कृषि पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मीं श्रीमती चंपादेवी पावले का जमीनी जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने ग्रामीण अंचलों की बुनियादी समस्याओं—जैसे सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल की दिक्कतों को बेहद करीब से देखा। यही कारण था कि उन्होंने जनसेवा को अपना माध्यम बनाया और सर्वप्रथम अध्यक्ष, जिला पंचायत के रूप में जिम्मेदारी संभालते हुए पूरे क्षेत्र में विकास कार्यों की झड़ी लगा दी।
साल 2013: पहली बार विधानसभा में गूंजी शोषितों और वनांचल की आवाज
श्रीमती चंपादेवी पावले के राजनीतिक जीवन में ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब भारतीय जनता पार्टी ने उनके जमीनी संघर्ष को पहचानते हुए वर्ष 2013 में उन्हें भरतपुर-सोनहत (01) विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया। जनता के अपार स्नेह की बदौलत उन्होंने इस चुनाव में शानदार जीत दर्ज की और पहली बार विधानसभा की दहलीज पर कदम रखा। विधायक बनते ही उन्होंने पूरे क्षेत्र को विकास के मुख्य पथ पर लाने के लिए दिन-रात एक कर दिया।
संसदीय सचिव के रूप में प्रशासनिक सूझबूझ का लोहा मनवाया
उनकी असाधारण सांगठनिक क्षमता और बेदाग छवि को देखते हुए वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उन्हें संसदीय सचिव जैसी अति-महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पद पर रहते हुए उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में अद्भुत कौशल का प्रदर्शन किया। इससे पूर्व वर्ष 2014-15 में वे विधानसभा की ‘सदन के पटल पर रखे गए पत्रों का परीक्षण करने संबंधी समिति’ की सम्मानित सदस्य भी रहीं।
शिक्षा की अलख जगाने पर मिला “साक्षरता राष्ट्रीय पुरस्कार”
चंपादेवी पावले केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक प्रखर सामाजिक सुधारक भी हैं। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में विशेषकर बालिकाओं और महिलाओं की शिक्षा के लिए किए गए उनके अतुलनीय प्रयासों के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च “साक्षरता राष्ट्रीय पुरस्कार” से सम्मानित किया जा चुका है। यह पुरस्कार उनके सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी गहरी निष्ठा को दर्शाता है।
जिले भर में जश्न: सेवा ही संगठन का दिखा रूप
आज उनकी 45वीं वर्षगांठ के अवसर पर पूरे एमसीबी (MCB) जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह है। सुबह से ही मंदिरों में उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। कार्यकर्ताओं द्वारा अस्पतालों में फल वितरण, गौशालाओं में चारा दान और वनांचल के गरीब परिवारों के बीच राशन व वस्त्र वितरण जैसे ‘सेवा ही संगठन’ के कार्यों के माध्यम से उनका जन्मदिन बेहद सादगी और गरिमा के साथ मनाया जा रहा है।
About The Author














