भाजपा आरक्षण नहीं, परिसीमन के जरिए सीटें बढ़ाने की फिराक में; कांग्रेस ने संसद में रोका जनविरोधी बिल
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को केवल एक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जबकि उसकी असली मंशा ‘परिसीमन संशोधन बिल’ को पिछले दरवाजे से पास कराना था। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक रही है और है, लेकिन भाजपा की ‘सीटों के षडयंत्र’ को वह सफल नहीं होने देगी।
‘महिला आरक्षण महज बहाना, परिसीमन है असली निशाना’
कांग्रेस ने देश के सामने यह सच रखा है कि 16 अप्रैल 2026 को संसद में पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक वास्तव में महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने का एक गुप्त एजेंडा था। भाजपा चाहती थी कि परिसीमन के जरिए राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें कर दी जाएं। जब पूरा देश महिलाओं के हक की प्रतीक्षा कर रहा है, तब सरकार ने इस विधेयक में ऐसी शर्तें जोड़ दीं जिससे राज्यों को गंभीर आपत्ति थी, जिसके कारण यह विधेयक गिर गया।
भाजपा की ‘सीट-नीति’ पर कांग्रेस के प्रहार
- पुराने आंकड़ों पर आधारित परिसीमन का विरोध: कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब 2026-27 की जनगणना शुरू हो चुकी है, तो सरकार 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन क्यों करना चाहती है?
- आरक्षण में देरी क्यों?: कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार की मंशा साफ है, तो वह परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सीटों में ही 33% महिला आरक्षण तुरंत लागू क्यों नहीं करती?
- कानून में संशोधन से बच रही भाजपा: वर्तमान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ कानून बन चुका है, लेकिन यह 2036 से पहले प्रभावी नहीं होगा। कांग्रेस ने मांग की है कि इसमें संशोधन कर इसे तत्काल लागू किया जाए, जो भाजपा नहीं कर रही।
- विपक्ष की एकजुटता ने रोका षडयंत्र: भाजपा की मंशा अपने मनमुताबिक सीटों के बंटवारे की थी, जिसे विपक्षी दलों की एकजुटता ने विफल कर दिया है।
इतिहास गवाह है: महिला सशक्तिकरण कांग्रेस की देन
प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने याद दिलाया कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में आज जो 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, वह कांग्रेस की नीतियों का ही परिणाम है:
- राजीव गांधी (1989): सबसे पहले पंचायतों में एक-तिहाई आरक्षण का विधेयक लाए।
- पीवी नरसिम्हा राव (1993): इनके कार्यकाल में आरक्षण कानून बना।
- डॉ. मनमोहन सिंह (2010): इनके नेतृत्व में राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित कराया गया था।
इनकी रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता में जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव, ब्लाक अध्यक्ष सौरव मिश्रा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रभा पटेल, पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष कृष्णमुरारी तिवारी, जिला कांग्रेस महामंत्री पूनम सिंह, जिलाध्यक्ष महिला कांग्रेस रूमा चटर्जी, रफीक मेमन, ब्लाक कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष रामनरेश पटेल, चुन्नू त्रिपाठी, सैफ नियाजी, बलबीर सिंह, निखिल यादव समेत अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे।



“भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में फेरबदल करना चाहती थी, जिसे कांग्रेस ने देशहित में सफल नहीं होने दिया।”




