लोकसभा में बहुमत के बावजूद ‘मिशन 33%’ पर लगा ब्रेक, प्रधानमंत्री मोदी खोल सकते हैं विपक्ष के खिलाफ मोर्चा !
नई दिल्ली/रायपुर (नई पहल ब्यूरो)। भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहने वाला है। लोकसभा में ‘महिला आरक्षण विधेयक’ (131वां संविधान संशोधन) के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण बिल के गिरने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश की जनता को संबोधित करेंगे। सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी इस संबोधन में न केवल सरकार का पक्ष रखेंगे, बल्कि बिल रोकने वाले विपक्षी दलों के खिलाफ कड़ा रुख भी अपना सकते हैं।
“लोकतंत्र के मंदिर में आधी आबादी के हक की लड़ाई ने आज एक नया मोड़ ले लिया है। एक तरफ सरकार की मंशा और दूसरी तरफ विपक्ष के ‘परिसीमन’ कार्ड के बीच महिला आरक्षण का सपना फिलहाल संसद की दहलीज पर ठिठक गया है। लेकिन हार मानने के बजाय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब सीधे ‘जनता की अदालत’ में जाने का फैसला किया है। आज रात का संबोधन सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि 2029 की चुनावी बिसात का वो पहला ऐलान हो सकता है, जो देश की राजनीति की दिशा बदल देगा।”
- संख्या बल का गणित: सरकार को बिल पास कराने के लिए 352 वोटों की दरकार थी, लेकिन सदन में केवल 298 वोट ही पक्ष में पड़े।
- विपक्ष का पेच: विपक्षी दलों ने सीटों के परिसीमन और दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को आधार बनाकर बिल का विरोध किया है।
- पीएम का मास्टरस्ट्रोक: चर्चा है कि प्रधानमंत्री इस विफलता को ‘महिला विरोधी राजनीति’ के रूप में पेश कर सकते हैं और इसे आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बना सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी इस संबोधन के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार महिलाओं को उनका हक देने के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही संसद में उसे बाधाओं का सामना करना पड़ा हो। आज रात होने वाली यह ‘मन की बात’ राजनीतिक गलियारों में बड़े भूकंप का संकेत दे रही है।







