पुनर्वास से परिवर्तन : सुकमा में 2392 लोगों ने हिंसा का दामन छोड़ चुना मुख्यधारा का रास्ता, विष्णु देव साय सरकार ने दिया सम्मानजनक जीवन का उपहार
नई पहल न्यूज नेटवर्क। सुकमा/रायपुर। नक्सलवाद के दंश से कराहते सुकमा की फिजां अब बदल चुकी है। जिस बस्तर को कभी बारूद की गंध के लिए जाना जाता था, वहां अब कौशल विकास और स्वावलंबन की नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार की नीति ‘बंदूक का जवाब विकास’ से देने की है। मुख्यमंत्री ने न केवल पुनर्वासितों से संवाद किया, बल्कि उनके हाथों में मोबाइल, आवास की चाबियां और नियुक्ति पत्र सौंपकर उन्हें समाज की अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया।

आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: स्टाइपेंड से लेकर सरकारी नौकरी तक
मुख्यमंत्री साय ने पुनर्वास केंद्र में चल रही गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आत्मसमर्पण कराना नहीं, बल्कि भटके हुए कदमों को स्थायी रोजगार और सम्मान देना है।
- कौशल विकास: केंद्र में राजमिस्त्री, सिलाई, कृषि उद्यमिता और ड्राइविंग जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- आर्थिक संबल: मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को हर महीने 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
- डिजिटल क्रांति: जिला प्रशासन ने 107 हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए हैं, ताकि वे दुनिया से जुड़ सकें।
- नारी शक्ति: पुनर्वास की इस प्रक्रिया में 115 महिलाएं तकनीकी प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।
नियुक्ति पत्र और आवास: अब खुद की छत और पक्की नौकरी
कार्यक्रम के दौरान भावुक कर देने वाले दृश्य तब सामने आए जब मुख्यमंत्री ने उन हाथों में नियुक्ति पत्र थमाए, जो कभी भटक गए थे।
- शासकीय सेवा: पुलिस विभाग में 20 और जिला प्रशासन में 95 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति व अन्य पदों पर शासकीय सेवा का अवसर दिया गया।
- शिक्षा का उजियारा: शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी पदस्थापना पत्र सौंपे गए।
- अपना घर: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 हितग्राहियों को उनके नए घर की चाबियां और पूर्णता प्रमाण पत्र दिए गए।
‘कॉफी टेबल बुक’ में दर्ज हुई सफलता की गाथा
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ नामक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। यह पुस्तक उन सफल कहानियों का संग्रह है, जो दर्शाती हैं कि कैसे नक्सल हिंसा प्रभावित परिवारों ने समाज की मुख्यधारा में लौटकर अपनी जिंदगी बदली।
“पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा प्राप्त कर सकता है।” > — विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री
सांस्कृतिक बदलाव का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों को सराहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुकमा के लोगों के सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद महेश कश्यप और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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