लापरवाही पर बड़ा एक्शन : 61 प्रधान पाठक और 7 प्राइवेट स्कूल संचालकों की अटकी सांसें, तीन दिन में मांगा जवाब
नई पहल न्यूज नेटवर्क। एमसीबी|जिले के शिक्षा विभाग में उस वक्त हड़कंप मच गया जब छात्र-छात्राओं की डिजिटल पहचान (APAAR ID) बनाने में ढिलाई बरतने वाले स्कूलों पर जिला प्रशासन ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर दी। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की नाराजगी के बाद, जिला पंचायत सीईओ और शिक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से 68 शिक्षण संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

समीक्षा बैठक में फूटा कलेक्टर का गुस्सा
जिले में APAAR आईडी जनरेशन की धीमी रफ्तार को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में जब आंकड़ों का खेल सामने आया, तो कलेक्टर डी. राहुल वेंकट बिफर पड़े। पोर्टल की रिपोर्ट ने पोल खोल दी कि जिले की कई शालाओं में अभी तक 50 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है। कलेक्टर ने स्पष्ट लहजे में कहा कि बच्चों के भविष्य और उनकी शैक्षणिक पहचान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्रवाई के रडार पर ‘पिछड़े’ विद्यालय
जिला परियोजना संचालक (समग्र शिक्षा) और जिला शिक्षा अधिकारी ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सूची जारी की है:
- 61 शासकीय प्रधान पाठक: सरकारी स्कूलों के मुखियाओं को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।
- 07 अशासकीय संस्था प्रमुख: प्राइवेट स्कूलों पर भी गाज गिरी है, जिनसे पूछा गया है कि महत्वपूर्ण योजना में सहयोग क्यों नहीं किया जा रहा?
क्यों अहम है APAAR आईडी ?
प्रशासन ने सख्त संदेश दिया है कि APAAR आईडी सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक रिकॉर्ड, स्कॉलरशिप और भविष्य की योजनाओं के लिए ‘डिजिटल आधार’ है। इस काम में देरी का मतलब है बच्चों के अधिकारों में देरी।



“प्रशासन का रुख साफ है: काम करें या कार्रवाई झेलें। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन स्कूल प्रमुखों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई और विभागीय गाज गिरना तय माना जा रहा है।”




