वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा में हुई शामिल, पंचायत विभाग में जमे ‘मलाईदार’ प्रभार और स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर दागे तीखे सवाल
रायपुर/पंडरिया। विधानसभा सत्र के चौथे दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा एक प्रखर वक्ता और जागरूक जन-प्रतिनिधि के रूप में उभरीं। सदन में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ पर आयोजित विशेष चर्चा में सहभागिता निभाते हुए उन्होंने जहाँ ऐतिहासिक तथ्यों के साथ विपक्ष को आड़े हाथों लिया, वहीं प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश में शिक्षक भर्ती, भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों पर कार्यवाही और शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर सरकार से जवाब तलब किया।
“इतिहास याद करना राजनीति नहीं, गर्व का विषय”: वंदे मातरम् पर तीखे बाण
विधायक भावना बोहरा ने वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इस गीत को राष्ट्रगान के बराबर सम्मान दिया था, फिर आज कांग्रेस को इस पर चर्चा से आपत्ति क्यों है?
उन्होंने वर्ष 2025 में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर संसद में हुई ऐतिहासिक बहस का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों को दोहराया— “वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है।” भावना बोहरा ने दो टूक कहा, “क्या अपनी जड़ों पर गर्व करना राजनीति है? अतीत की गलतियों को स्वीकार करना कमजोरी नहीं, परिपक्वता है। मोदी जी के नेतृत्व में नया भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेज रहा है और यहाँ तुष्टिकरण के लिए कोई स्थान नहीं है।”
भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख: EOW और ACB के घेरे में आए अधिकारियों का मुद्दा
प्रशासनिक शुचिता को लेकर गंभीर भावना बोहरा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि EOW/ACB द्वारा दर्ज अपराधों के बावजूद कितने अधिकारियों पर कार्यवाही हुई?



- डिप्टी सीएम का जवाब: उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कुल 05 अधिकारियों के विरुद्ध पत्र प्राप्त हुए हैं। इनमें से 03 प्रकरण आदिम जाति विकास विभाग को भेजे गए हैं और 02 पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
अतिरिक्त प्रभार और नियम विरुद्ध नियुक्तियों पर घेरा
विधायक बोहरा ने उन अधिकारियों पर भी सवाल उठाए जो मूल विभाग के अलावा अन्य विभागों में अतिरिक्त प्रभार पर जमे हुए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इन नियुक्तियों में भारसाधक मंत्री का अनुमोदन लिया गया है? सदन में जानकारी दी गई कि वर्तमान में 06 अधिकारी अतिरिक्त प्रभार पर हैं, जिनमें से 05 प्रकरणों में मंत्री का अनुमोदन प्राप्त नहीं है, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: शिक्षक विहीन स्कूल और मिड-डे मील का मामला
पंडरिया विधायक ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सदन के पटल पर रखा:
- शिक्षकों की कमी: स्कूल शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि बस्तर और सरगुजा जैसे वनांचल क्षेत्रों में 19 स्कूल शिक्षक विहीन हैं और 1178 स्कूल एकल शिक्षकीय हैं।
- मिड-डे मील: बलरामपुर सहित अन्य स्थानों पर मध्याह्न भोजन से बच्चों के बीमार होने की घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए भावना बोहरा ने कार्यवाही की मांग की। मंत्री ने बताया कि दोषी सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) का अनुबंध रद्द कर दिया गया है।
- शिक्षक भर्ती: सितंबर-अक्टूबर 2025 में विज्ञापित लगभग 5000 शिक्षकों की भर्ती की वर्तमान स्थिति पर भी उन्होंने विस्तृत जानकारी मांगी।
सटीक सवाल और सक्रिय सहभागिता
भावना बोहरा ने शासकीय विद्यालयों में पुस्तक वितरण में होने वाले विलंब और पुस्तकों की ट्रैकिंग के लिए ‘यूनिक नंबर’ प्रणाली पर भी प्रश्न किए। सदन में सरकार ने बताया कि इस बार मांग के अनुरूप 2.91 करोड़ से अधिक पुस्तकों का वितरण समय पर सुनिश्चित किया गया है। विधानसभा सत्र में भावना बोहरा की सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे न केवल अपने क्षेत्र (पंडरिया) की समस्याओं के प्रति सजग हैं, बल्कि राष्ट्रवाद और प्रदेश के प्रशासनिक सुधारों को लेकर भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपनी बात रख रही हैं।




