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वीडियो : संघर्ष के बाद भी इलाज नहीं ! आदित्येश्वर शरण सिंहदेव की पहल से मिली राहत, इलाज से लेकर सरगुजा संरक्षण तक सिंहदेव मुखर

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आदित्येश्वर शरण सिंहदेव की पहल से परसोढि कला के पीड़ित ग्रामीणों को मिला इलाज

नई पहल न्यूज नेटवर्क। अंबिकापुर। सरगुजा जिले के ग्राम परसोढि कला में 3 दिसंबर को ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में घायल ग्रामीणों को आखिरकार न्याय और राहत की दिशा में पहला ठोस कदम मिला। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंहदेव की पहल पर संजीवनी अस्पताल, अम्बिकापुर की 7 सदस्यीय मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर स्वास्थ्य शिविर लगाया और दर्जनों आहत ग्रामीणों का उपचार किया। लंबे समय से इलाज के अभाव में पीड़ित ग्रामीणों को यह बड़ी राहत मानी जा रही है।

संघर्ष के बाद ग्रामीणों को नहीं मिला इलाज

3 दिसंबर को हुए संघर्ष के दौरान कई ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि घटना के बाद प्रशासन द्वारा केवल कुछ लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि अधिकांश आहत ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। सिर में चोट लगने वाले कुछ ग्रामीणों को प्राथमिक इलाज के बाद छोड़ दिया गया और अन्य घायल ग्रामीण इलाज के अभाव में अपने हाल पर छोड़ दिए गए।

परसोढि कला दौरे में सामने आई सच्चाई

शुक्रवार को परसोढि कला के दौरे के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य श्री आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने ग्रामीणों से प्रत्यक्ष संवाद किया। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें संघर्ष के बाद हुए अन्याय और इलाज की कमी की पूरी जानकारी दी। ग्रामीणों की व्यथा सुनकर श्री सिंहदेव ने इसे गंभीर मानवीय लापरवाही बताया और तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।

आदित्येश्वर शरण सिंहदेव की पहल पर मिला इलाज

ग्रामीणों की स्थिति को देखते हुए आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने संजीवनी अस्पताल, अम्बिकापुर के संचालक एवं पूर्व महापौर डॉ. अजय तिर्की से मेडिकल सहायता का अनुरोध किया। उनकी पहल पर आज अस्पताल की 7 सदस्यीय चिकित्सा टीम परसोढि कला पहुंची और कैंप लगाकर ग्रामीणों का इलाज किया।

43 ग्रामीणों का उपचार, 5 को अस्पताल रेफर

संजीवनी अस्पताल के संचालक डॉ. अजय तिर्की ने जानकारी दी कि मेडिकल कैंप के दौरान कुल 43 ग्रामीणों का उपचार किया गया। इनमें से 5 ग्रामीणों में फैक्चर की संभावना पाए जाने पर उन्हें एक्स-रे एवं आगे की जांच के लिए अस्पताल बुलाया गया है। कई ग्रामीण इससे पहले व्यक्तिगत प्रयासों से स्थानीय स्तर पर इलाज कराने को मजबूर थे।

मेडिकल टीम ने निभाई मानवीय जिम्मेदारी

मेडिकल कैंप में आपातकालीन चिकित्सक डॉ. ऋषभ, डॉ. इकबाल, ड्रेसर अनिल कश्यप, नर्स सिस्टर निशा एवं मोनिका के साथ मेडिकल स्टाफ श्री लक्ष्मी और श्री लालजी शामिल थे। टीम ने ग्रामीणों की जांच कर दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा सलाह दी।

प्रशासनिक असंवेदनशीलता पर जताई नाराजगी

आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने संघर्ष की घटना को असंवेदनशील बताते हुए कहा कि प्रशासन को बल प्रयोग से बचना चाहिए था और ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उचित प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी। उन्होंने इस बात पर भी दुख व्यक्त किया कि संघर्ष में दोनों पक्षों को चोटें आईं और ग्रामीणों को समय पर इलाज नहीं मिला।

कानूनी सहायता का भी दिया भरोसा

श्री सिंहदेव ने परसोढि कला के ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।

सरगुजा की संस्कृति और पर्यावरण बचाने की अपील

मीडिया से बातचीत में न आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने कहा कि विकास के लिए खनन आवश्यक है, लेकिन रामगढ़, परसोढि कला और मैनपाट क्षेत्र में हो रहे खनन से सरगुजा की संस्कृति, सभ्यता और पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। यह मुद्दा राजनीतिक नहीं बल्कि सरगुजा के अस्तित्व से जुड़ा है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मतभेद भुलाकर सरगुजा को बचाने के लिए एकजुट होने की अपील की।

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