
शासन के आदेशों की उड़ रही धज्जियां, आरटीआई कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज
कोरिया। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आरटीआई (सूचना का अधिकार) को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए भले ही ऑनलाइन पोर्टल https://rtionline.cg.gov.in/ शुरू किया गया हो, लेकिन कोरिया जिले में यह व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिले के कई विभाग इस पोर्टल से अब तक नहीं जुड़े हैं, जिससे आम नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
जिले के वन विभाग, राजस्व विभाग, यहां तक कि कलेक्टर कार्यालय तक की कई शाखाएं हैं, जिन्होंने आज तक पोर्टल में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। नतीजा ये है कि सूचना मांगने वाले आवेदक या तो आवेदन ही नहीं कर पा रहे हैं, या फिर उन्हें डाक और स्पीड पोस्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ समय और धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि शासन के डिजिटल गवर्नेंस के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं।


आदेश केवल कागजों तक सीमित!



छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 1 अप्रैल 2025 को आदेश क्रमांक GENS-2001/65/2025-GAD-13 जारी कर सभी विभागों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को यह निर्देश दिया कि आरटीआई पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों की पूरी प्रक्रिया – सूचना देना, फीस की मांग, प्रथम अपील सहित सभी कार्यवाही पोर्टल के माध्यम से ही की जाए। साथ ही, यह भी कहा गया कि ऑफलाइन जवाब देने से स्टेशनरी, डाक टिकट और समय की अनावश्यक बर्बादी होती है।
फिर भी, जमीनी हकीकत यह है कि इस आदेश को गंभीरता से लेने वाला कोई नहीं है। विभागों की लापरवाही इस हद तक है कि न तो वे स्वयं पोर्टल से जुड़े हैं और न ही अपने अधीनस्थ जनसूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को प्रशिक्षित या निर्देशित किया है।

आरटीआई कार्यकर्ता अशोक श्रीवास्तव ने उठाई आवाज
इस गंभीर स्थिति पर आरटीआई कार्यकर्ता अशोक श्रीवास्तव ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा, “शासन लगातार आरटीआई प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए आदेश जारी कर रहा है। बजट की जानकारी, विभागीय खर्च और जनहित के विषयों को स्वत: सार्वजनिक करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। लेकिन कोरिया जिले में ये आदेश केवल फाइलों तक ही सीमित हैं।”

उन्होंने सवाल उठाया कि जब शासन स्तर पर डिजिटल आरटीआई को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो जिला स्तरीय अधिकारी इस दिशा में गंभीर क्यों नहीं हैं? आखिर क्यों अब तक पोर्टल में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया? क्यों आवेदकों को अनावश्यक डाक शुल्क, प्रिंटिंग लागत और समय की बर्बादी झेलनी पड़ रही है?
लापरवाह अधिकारियों पर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
यह कोई पहला मामला नहीं है जब विभागों की लापरवाही सामने आई हो। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस लापरवाही पर आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 4(1)(b) में स्पष्ट प्रावधान है कि सभी विभागों को अपने कार्यकलाप, बजट, नीति और निर्णय आदि की जानकारी स्वत: वेबसाइट और पोर्टल पर प्रदर्शित करनी चाहिए। लेकिन कोरिया जिले के कई विभाग इन प्रावधानों का पूरी तरह से उल्लंघन कर रहे हैं।
अब निगाहें शासन और सूचना आयोग पर
अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन और राज्य सूचना आयोग इस पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या वे कोरिया जिले के इन लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करेंगे या फिर यह मुद्दा भी अन्य आदेशों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
आरटीआई कार्यकर्ताओं की मांग है कि जो भी अधिकारी पोर्टल से नहीं जुड़े हैं, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए और उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। तभी आरटीआई का मकसद और नागरिकों को सूचना का अधिकार वास्तव में सशक्त हो पाएगा।




