छत्तीसगढ़ के सांसदों का रिपोर्ट कार्ड जारी; कमलेश जांगड़े और ज्योत्सना महंत ने विकास कार्यों में मारी बाजी, कांकेर के भोजराज नाग फिसड्डी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ में विकास की रफ्तार का असली चेहरा अब जनता के सामने है। ‘सांसद निधि’ खर्च करने के मामले में प्रदेश के माननीय पीछे नहीं हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस रेस में आधी आबादी यानी महिला सांसदों ने पुरुषों को काफी पीछे छोड़ दिया है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जांजगीर-चांपा की भाजपा सांसद कमलेश जांगड़े और कोरबा की कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत विकास कार्यों की अनुशंसा और बजट खर्च करने के मामले में टॉप पर हैं। वहीं, कुछ दिग्गज सांसद ऐसे भी हैं जिनके क्षेत्र में बजट होने के बावजूद काम की रफ्तार बेहद सुस्त है।
सांसदों का स्कोरबोर्ड: कौन है ‘विकास पुरुष’ और कौन पीछे ?
दस्तावेज के विश्लेषण से पता चलता है कि जहां कुछ सांसदों ने सैकड़ों कार्यों की मंजूरी दिलाई है, वहीं कुछ का आंकड़ा अभी दहाई (Double Digit) तक ही सीमित है।
- कमलेश जांगड़े (जांजगीर-चांपा): विकास की निर्विवाद चैंपियन। 278 कार्यों की अनुशंसा की और 8.44 करोड़ रुपये खर्च कर प्रदेश में सबसे आगे रहीं। उनके 157 काम पूरे भी हो चुके हैं।
- ज्योत्सना महंत (कोरबा): सबसे ज्यादा 287 कार्यों की अनुशंसा कर रिकॉर्ड बनाया। अब तक 6.30 करोड़ रुपये खर्च कर दूसरे स्थान पर मजबूती से टिकी हैं।
- भोजराज नाग (कांकेर): प्रदर्शन के मामले में सबसे निचले पायदान पर। मात्र 63 कार्यों की अनुशंसा की और सिर्फ 2.87 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए।
बस्तर में विकास पर ‘ब्रेक’: सबसे कम काम पूरे होने का कलंक
आंकड़ों का सबसे चिंताजनक पहलू बस्तर लोकसभा क्षेत्र से आया है। प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों में बस्तर इकलौता ऐसा क्षेत्र है जहां अब तक सबसे कम काम पूरे हुए हैं। सांसद महेश कश्यप ने 170 कार्यों की अनुशंसा तो की, लेकिन धरातल पर सिर्फ 15 काम ही पूरे हो सके हैं। यह प्रशासन और क्रियान्वयन एजेंसी की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
बजट ज्यादा, पर काम कम: महंत ने की सबसे ज्यादा अनुशंसा
दिलचस्प तथ्य यह है कि कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत के पास सबसे अधिक 10.53 करोड़ रुपये की कुल राशि उपलब्ध है। उन्होंने कार्यों की अनुशंसा (287) करने में सबको पछाड़ा है, लेकिन राशि खर्च करने के मामले में वह कमलेश जांगड़े से पीछे रह गईं। वहीं, रायपुर के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल और दुर्ग के विजय बघेल के क्षेत्रों में भी काम की रफ्तार को और गति देने की जरूरत महसूस की जा रही है।



यह रिपोर्ट कार्ड साफ संकेत देता है कि आगामी चुनावों और जनता के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए सांसदों को न केवल कागजों पर काम दिखाना होगा, बल्कि ‘सांसद निधि’ के बजट को धरातल पर उतारकर विकास कार्यों को समय पर पूरा करना होगा। फिलहाल, महिला सांसदों ने यह साबित कर दिया है कि वे अपने क्षेत्र की जनता की जरूरतों को लेकर अधिक सजग हैं।




