
माँ बोली दोनों बेटों पर गर्व, देश के लिए बने है दोनों बेटे, शहीद भी हो जाए तो गम नहीं, फख्र होगा
रविकांत सिंह राजपूत। मनेन्द्रगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के नागपुर पंचायत की सोनमती साहू को अपने दोनों बेटे के सेना में रहकर देश सेवा करने पर गर्व कर रही है। सोनमती भले खुद ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन उन्होंने बेटों को पढ़ा लिखाकर देश सेवा के काबिल बनाया। उनके बड़े जिनकी उम्र 38 साल है वीर नारायण साहू एसटीएफ में दंतेवाड़ा में तैनात रहकर नक्सलियों से लोहा ले रहे है तो छोटा बेटा रामायण साहू जिनकी उम्र 36 साल है वो बीएसएफ में सिलीगुड़ी बॉर्डर में तैनात होकर देश की सुरक्षा कर है।
नई पहल आज आपको यह खबर इसलिए पढा रह है कि, आज मदर्स डे है। माँ सबसे बड़ी योद्धा होती है वैसे ही एक माँ के दो बेटे जो सेना में है वह योद्धा बनकर सीमा पर युद्ध लड़ रहें है। एक माँ के दोनों बेटों के सेना में होने की खबर कई मायनों में गर्व और समर्पण की खबर है। यह कहानी माता के लिए गर्व और चिंता का एक मिश्रण भी है, क्योंकि वे अपने बच्चों की सुरक्षा के साथ साथ देशवासियों के लिए प्रार्थना करती हैं, और बेटों को देश सेवा में समर्पित देखती हैं। एक माँ के लिए, अपने दोनों बेटों को सेना में देखना एक गर्व की बात है। यह दर्शाता है कि उसके बच्चों ने अपने देश के लिए अपने जीवन को समर्पित किया है। हालांकि, माँ को चिंता भी होती है, खासकर जब उनके बच्चे सीमा पर तैनात होते हैं या युद्ध क्षेत्र में सेवा कर रहे होते हैं। यह खबर माँ और बच्चों के बीच के बंधन को भी दर्शाती है। यह एक ऐसी खबर है जो लोगों को प्रेरित करती है और देश सेवा के लिए समर्पण के महत्व को दर्शाती है। सोनमती ने बहुत ही फख्र से नई पहल को बताया कि मेरे तीन बेटे सेना में जवान थे, जिसमे मेरे देवर का बेटा निकेश कुमार साहू जिसकी उम्र महज 24 साल थी जो बिहार के बेतिया में पदस्थ था वो 2023 में जुलाई माह में शहीद हो गया। अब मेरे दो बेटे वीर नारायण और राम नारायण सेना में रहकर देश सेवा में लगे है। नई पहल ने जब सोनमती से यह पूछा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात चल रहे है तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हमसे गलत करने वालो का साथ दिया है। हमेशा आतंकवादी हमला कराकर निर्दोष और देश सेवा में लगे नौजवान बेटों को शहीद किया है। पाकिस्तान से आर पार की लड़ाई होनी ही चाहिए। और इस लड़ाई में अगर मेरे दोनों बेटे शहीद भी हो जाए तो मुझे गम नहीं फख्र होगा कि बेटों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। सोनमती बताती है कि, जब उनका छोटा बेटा रामनारायण वाघा बॉर्डर में पदस्थ था तो उसने मुझे और अपने पिता को घुमाने बुलाया था वहां देश के वीर जवानों का देश के प्रति प्रेम जो मैंने देखा वो मुझे अंतिम सांस तक याद रहेगा।
जब बेटे सरहद पर तैनात होते हैं, तब घर पर उनकी माँ, बहनें, पत्नियाँ और बेटियाँ भी जंग लड़ती हैं—संघर्ष की, इंतज़ार की, और हौसले की।
आज मदर्स डे पर
उनके लिए भी एक प्रार्थना ज़रूर कीजिएगा… क्योंकि वो भी भारत माँ की सच्ची वीरांगनाएँ हैं।



पुलिस में नहीं मिला इज्जत तो सेना जॉइन किया

सोनवती साहू के बड़े बेटे वीर नारायण साहू पहले छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत थे इस दौरान पुलिस चौकी में किसी बात को लेकर विवाद हो गया तो उन्होंने सेना में भर्ती होने की तैयारी शुरू कर दी। सेना में चयन भी हो गया और सेना जॉइन कर लिया। वीर नारायण अभी दंतेवाड़ा में पदस्थ है और कहते है कि मेरी माँ को हम दोनों पर बहुत गर्व करती है कि, हम सेना में पदस्थ होकर सीमा पर देश की सुरक्षा में लगे है।
माँ ने सेना में जाने के लिए प्रेरित किया

सोनवती के छोटे बेटे राम नारायण साहू सिलीगुड़ी में बीएसएफ जवान के पद पर पदस्थ है। एक महीने पहले वे कश्मीर में पदस्थ थे। उनका कहना है कि, जब मेरे बड़े भैया सेना में नौकरी करने लग गए तो मैं स्कूली पढ़ाई करने के बाद गांव में ही खेती बाड़ी का काम करने लगा तो माँ ने मुझसे कहा कि, वीर नारायण की तरह तू भी फौज में जाने की तैयारी कर तब मैं मैदान में जाकर दौड़, लंबी कूद ऊंची कूद की तैयारी करने लगा और फिर भर्ती में गया जहां मेरा सेलेक्शन हुआ। रामनारायण बताते है जब भी हम दोनों भाई में से कोई भी एक भाई जब छुट्टी में घर जाता है तो हमें देखते ही मेरी माँ के आंखों में खुशी के आंसू उमड़ पड़ते है।





